राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए 13 बांग्लादेशी नागरिक पिछले एक वर्ष से गुरुग्राम के विभिन्न इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे। गुरुग्राम पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सत्यापन अभियान के दौरान दो दिनों में इन सभी को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि ये सभी नागरिक भारत-बांग्लादेश सीमा के कालियागंज बॉर्डर से एक बांग्लादेशी एजेंट की मदद से अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर आए थे।
सेक्टर-39 क्राइम ब्रांच प्रभारी एसआई मोहित कुमार के निगरानी में हेड कॉन्स्टेबल अरुण और रिंकू ने रविवार और सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया। इस दौरान निर्माणाधीन साइटों और झुग्गी बस्तियों में रह रहे संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों की जांच की गई।
बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद
सोहना, ट्यूलिप चौक, सेक्टर-70, नखड़ौला, मानेसर और अन्य स्थानों पर स्थित झुग्गियों एवं निर्माणाधीन साइटों से कुल 13 लोग ऐसे मिले, जिनके पास भारत का कोई वैध पहचान पत्र नहीं था। पूछताछ के दौरान उनके पास से बांग्लादेश के पहचान पत्र बरामद किए गए।
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान इस्लाम, सुमोन अली, आरिफ, सबीर हुसैन, रूबल, साकिब, रोब्यूल, गुलजार हुसैन, नईम, महबूब, हमीदुर इस्लाम, अतिहार रहमान और हैसम के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये सभी बांग्लादेश की राजधानी ढाका के आसपास के क्षेत्रों के निवासी हैं।
पूछताछ में पता चला कि सभी आरोपी कालियागंज बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और यहां मजदूर बनकर रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
दलालों के जरिए परिवार को भेजते थे पैसे
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी लोग करीब एक साल पहले भारत आए थे। भारत में प्रवेश करने के बाद वे दिल्ली पहुंचे और वहां से गुरुग्राम आ गए। यहां वे झुग्गियों में रहकर विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं में मजदूरी करते थे।
पूछताछ में पता चला कि उन्हें हर महीने लगभग 18 से 20 हजार रुपये मजदूरी मिलती थी। उनकी उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच है। वे दलालों और अन्य माध्यमों के जरिए अपने परिवारों को ऑनलाइन पैसे भेजते थे। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
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