Gujarat Child Trafficking: गुजरात के बनासकांठा जिले में चार साल के एक बच्चे के अपहरण की जांच के दौरान पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। दरअसल 6 अप्रैल के दिन वडगाम क्षेत्र से एक बच्चे को अगवा कर लिया गया था। मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया, लेकिन जांच यहीं नहीं रुकी और इससे एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया अंतरराज्यीय नेटवर्क
प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में ऐसे संकेत मिले कि यह कोई सामान्य अपहरण का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की गतिविधि है। इसके बाद तकनीकी विश्लेषण और सूचनाओं के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का संचालन कई राज्यों में फैला हुआ है।
तेलंगाना से पकड़ा गया सरगना
पुलिस ने इस गिरोह के मुख्य आरोपी बोदाशु नागराजू उर्फ मुरुगन को तेलंगाना से गिरफ्तार किया। उसके साथ दो अन्य आरोपी कसरापु तिरुपति और केलेती गंगाराजन को भी पकड़ा गया। ये सभी तेलंगाना के निवासी हैं और लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
कई राज्यों में फैला था इस नेटवर्क का जाल
जांच में सामने आया कि ‘मुरुगन गैंग’ गुजरात, दिल्ली, तेलंगाना और महाराष्ट्र में सक्रिय था। यह गिरोह नवजात बच्चों को चोरी कर उन्हें ऊंचे दामों में बेचता था। अब तक की जांच में कम से कम पांच बच्चों के अपहरण और बिक्री की पुष्टि हो चुकी है, हालांकि पुलिस को आशंका है कि यह संख्या और अधिक हो सकती है।
आईवीएफ और सरोगेसी से शुरू हुआ खेल
मुख्य आरोपी मुरुगन पहले आईवीएफ केंद्रों के लिए महिलाओं की व्यवस्था करता था। वह उन महिलाओं को जोड़ता था जो गर्भधारण नहीं कर सकती थीं और उन महिलाओं से संपर्क करवाता था जो आर्थिक लाभ के लिए अंडाणु दान या सरोगेसी के लिए तैयार होती थीं। इस काम के बदले उसे प्रति महिला 5,000 से 6,000 रुपये का कमीशन मिलता था।
लालच ने बदल दिया अपराध का तरीका
धीरे-धीरे अधिक पैसे कमाने की चाह में मुरुगन बच्चा तस्करी नेटवर्क से जुड़ गया। इसके बाद उसने नवजात बच्चों को चोरी कर उन्हें बेचने का काम शुरू कर दिया। यह गिरोह जन्म के 24 से 48 घंटों के भीतर ही बच्चों को अपने कब्जे में ले लेता था, जिससे उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।
मोटी रकम में बेचे जाते थे नवजात
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह नवजात बच्चों को ऊंची कीमतों पर बेचता था। ये बच्चे गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली से अपहरण किए जाते थे और फिर स्थानीय बिचौलियों के जरिए अलग-अलग जगहों पर बेचे जाते थे।
कई राज्यों में फैला तस्करी का नेटवर्क
अब तक की जांच में यह सामने आया है कि गिरोह ने गुजरात और महाराष्ट्र से दो-दो, तेलंगाना से तीन और दिल्ली से एक बच्चे को बेचने की बात स्वीकार की है। पुलिस को संदेह है कि यह नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है और अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है।
बच्चों को सुरक्षित छुड़ाने की कोशिश जारी
गिरफ्तार आरोपियों को पालनपुर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब उन बच्चों की पहचान और बरामदगी पर काम कर रही है जिन्हें इस गिरोह ने बेचा था। इसके साथ ही पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए अन्य राज्यों की पुलिस के साथ भी बातचीत जारी है।
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