राजस्थान के जैसलमेर जिले के दंदेवाला इलाके में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिलने से देश की ऊर्जा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की इस खोज को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है। थार के रेगिस्तान के नीचे मिले इस गैस भंडार से राजस्थान में ऊर्जा, उद्योग और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद बढ़ गई है।
भारत-पाक सीमा के पास मिला गैस भंडार
दंदेवाला जैसलमेर जिले का सीमावर्ती इलाका है, जो भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है। चारों तरफ फैले रेगिस्तान और गर्म मौसम के बावजूद यह क्षेत्र ऊर्जा संसाधनों के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। गर्मियों में यहां तापमान 50 से 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में पारा शून्य के करीब चला जाता है। तेज रेतीले तूफान और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच यह खोज काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सिर्फ 950 मीटर नीचे मिला गैस भंडार
इस खोज की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम गहराई है। प्राकृतिक गैस जमीन से केवल 950 मीटर नीचे मिली है। ऊर्जा क्षेत्र में इतनी कम गहराई पर हाइड्रोकार्बन मिलना बड़ी सफलता माना जाता है क्योंकि इससे उत्पादन लागत कम रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार गैस की बेहतर गुणवत्ता, कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम और गैस का दबाव मजबूत पाया गया है। इससे भविष्य में लगातार उत्पादन की संभावना बढ़ गई है।
रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
रिपोर्ट के मुताबिक यहां से प्रतिदिन करीब 25 हजार मानक घन मीटर गैस निकाली जा सकती है। कुल अनुमानित भंडार लगभग 75 मिलियन मानक घन मीटर बताया जा रहा है। हालांकि यह मात्रा देश की कुल ऊर्जा जरूरतों की तुलना में बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह बड़ी उपलब्धि हो सकती है।
पहले से ऊर्जा केंद्र रहा है दंदेवाला
ऑयल इंडिया लिमिटेड इस क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही है। वर्ष 1996 में यहां गैस प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किया गया था। दंदेवाला, तनोट और बाघेवाला क्षेत्रों से निकली गैस को यहां प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए गैस जैसलमेर के रामगढ़ थर्मल पावर प्लांट तक पहुंचाई जाती है, जहां इससे बिजली उत्पादन होता है।
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