गुजरात(Gujarat) के सूरत में पड़ने वाले पांडेसरा क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे जानकर हर कोई हैरान है। ये ऐसा मामला है जिसने प्रशासन की सोच को भी हिलाकर रख दिया है। खबर ये है कि यहां पर रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मां की है। उनके ऐसा करने की वजह के रुप में उनके द्वारा गंभीर रूप से आरोप लगाए गए हैं जो उनको लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने को लेकर हैं जिनके कारण इस समय उनके लिए जीना काफी मुश्किल हो गया है।
पांडेसरा के जलाराम नगर के रहने वाले एक 73 वर्षीय श्यामभाई कपूरजी गहलोत और उनकी पत्नी जिनकी उम्र करीब 68 वर्ष की है उनका कहना है कि साल 2016 में उनके साथ एक ऐसी घटना हुई थी जिसने उनको जीवन भर का गम दे दिया था। एक भयानक सड़क हादसे में उनके परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद से अब सिर्फ वो और उनकी पत्नी ही जैसे तैसे आज तक अपना जीवन जीते आए हैं। उस घटना के बाद से ही सिर्फ वो और उनकी पत्नी ही एक दूसरे का सहारा हैं। ये ऐसा गहरा गम है जिससे वो दोनों आज तक उबर नहीं पाए हैं।
दुकानों को लेकर शुरू हुआ विवाद
दंपति के अनुसार उन्होंने वर्ष 2006 में बमरोली क्षेत्र में कुछ छोटी व्यावसायिक दुकानें खरीदी थीं। बाद में यह इलाका सूरत नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में शामिल हो गया और वे नियमित रूप से सभी करों का भुगतान करते रहे। उनका दावा है कि वर्ष 2021 में उनकी दुकानों को बिना पूर्व सूचना के सील कर दिया गया था।
इस कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कई वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें राहत मिली और इस वर्ष जनवरी में संबंधित विभाग की रिपोर्ट के आधार पर दुकानों की सील खोल दी गई। इसके बाद उन्होंने अपना व्यवसाय दोबारा शुरू करने का प्रयास किया।
लगाए गंभीर आरोप
गहलोत दंपति का आरोप है कि मई 2026 में उनकी दुकानों को एक बार फिर सील कर दिया गया। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से पहले उन्हें कोई स्पष्ट नोटिस या कारण नहीं बताया गया। साथ ही उन्होंने कुछ अधिकारियों और स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों पर दबाव बनाने तथा आर्थिक लेनदेन की मांग करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
कलेक्टर से लगाई इच्छामृत्यु की गुहार
दंपति का कहना है कि लगातार चल रही कानूनी लड़ाइयों, आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है। उनका दावा है कि अब उनके पास जीवन को आगे बढ़ाने की कोई उम्मीद नहीं बची है। इसी वजह से उन्होंने जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की है।
फिलहाल इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि दंपति की गुहार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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