अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प(Donald Trump) ने सोमवार को ईरान के साथ जारी युद्धविराम को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हालात बेहद नाजुक हो चुके हैं और यह समझौता अब “वेंटिलेटर” पर टिका दिखाई दे रहा है। ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब तेहरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में ऐसा मसौदा भेजा गया जिसे वॉशिंगटन ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि करीब एक महीने पहले लागू हुआ युद्धविराम अब बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की प्रतिक्रिया पढ़ने के बाद उन्हें साफ लग गया कि बातचीत सही दिशा में नहीं बढ़ रही। ट्रंप ने तंज भरे अंदाज में कहा कि यह समझौता ऐसे मरीज की तरह है जिसकी बचने की संभावना बेहद कम रह गई हो है।
कब लागू हुआ था युद्धविराम ?
ईरान और अमेरिका के बीच यह युद्धविराम 8 अप्रैल से लागू हुआ था। उस दौरान ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। शुरुआती तौर पर दो सप्ताह के लिए तय इस व्यवस्था को बाद में 21 अप्रैल को आगे बढ़ा दिया गया था। हालांकि शुरुआत से ही दोनों देश एक-दूसरे पर शर्तों के उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं।
तनाव का एक बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी बना हुआ है जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। ट्रंप ने पहले इस जलमार्ग को तुरंत खोलने की मांग की थी। युद्ध के बाद यहां आवाजाही प्रभावित हुई जिसके चलते अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में नौसैनिक गतिविधियां भी बढ़ा दी थीं।
क्षेत्र में कम नहीं हुआ तनाव
युद्धविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ है। हाल के दिनों में ईरान और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच कई घटनाओं ने हालात को और संवेदनशील बना दिया। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, हॉर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच टकराव जैसी स्थिति भी बनी।
इस बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ईरान की प्रतिक्रिया को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में युद्धविराम को बचाए रखना आसान नहीं दिख रहा।
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