US-Iran Tension: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर सीमित सैन्य हमले का दावा किया है। वहीं, अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गोपनीय जानकारी देने वालों के लिए 20 मिलियन डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है।
ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर अमेरिकी हमला
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर सीमित सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने इस हमले को मामूली बताते हुए कहा कि ईरान ने हाल ही में एक छोटा एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम तैयार किया था, जिसे अमेरिकी सेना ने महज 5 से 15 मिनट के भीतर नष्ट कर दिया।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘उन्होंने थोड़ा-बहुत एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम बनाया था और हमने उसे करीब 15 मिनट में, शायद पांच मिनट में ही खत्म कर दिया.’ इस बीच ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि शुक्रवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित केश्म द्वीप के सुजा इलाके में दो धमाकों की आवाज सुनी गई। यह क्षेत्र ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक MQ-1 ड्रोन को मार गिराया है।
केश्म और हेंगम द्वीपों पर भी हुए थे धमाके
इससे पहले सोमवार को भी ईरान के केश्म और हेंगम द्वीपों के अलावा मुख्य भूमि पर बंदर अब्बास के आसपास धमाकों की खबरें सामने आई थीं। उस समय अमेरिकी सेना ने अपनी कार्रवाई को ‘रक्षात्मक हमला’ बताया था। शुक्रवार को हुई नई सैन्य कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि मंगलवार को अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा चुनावी झटका लगा था। चुनाव के बाद ईरान पर यह पहली नई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई बताई गई है।
क्या ईरान युद्ध बना ट्रंप की चुनावी परेशानी?
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी को मिले चुनावी झटके के पीछे ईरान युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। युद्ध के चलते ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों में देखने को मिला है। अमेरिका में भी महंगे ईंधन और युद्ध से निपटने के ट्रंप के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रंप लगातार ईरान को तबाह करने की चेतावनी देते रहे हैं, लेकिन कई मौकों पर उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत का रास्ता निकलने की संभावना भी जताई है। शुक्रवार को उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा, ‘हम ईरान से बात कर रहे हैं. हम पहले से ही बातचीत कर रहे हैं.’
परमाणु कार्यक्रम की जानकारी देने पर 20 मिलियन डॉलर का इनाम
सैन्य कार्रवाई के साथ ही अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग के ‘रिवार्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले व्यक्ति को 20 मिलियन डॉलर यानी 2 करोड़ डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जानकारी देने वाले व्यक्ति को दूसरी जगह बसाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 6 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस इनाम की घोषणा से जुड़ी जानकारी साझा की। अमेरिका को ईरान के परमाणु ठिकानों, वहां इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, वैज्ञानिकों और इस कार्यक्रम से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी चाहिए। इसके अलावा परमाणु सामग्री और उपकरणों की आवाजाही से संबंधित सूचनाएं भी इनाम के दायरे में शामिल हैं। अमेरिका ने ऐसी जानकारी रखने वाले लोगों से ‘रिवार्ड्स फॉर जस्टिस’ के आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करने की अपील की है।
ईरान के यूरेनियम संवर्धन को लेकर अमेरिका की चिंता
अमेरिका की ओर से जारी इनाम संबंधी नोटिस में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की 2025 की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान यूरेनियम को 60 फीसदी तक शुद्धता के स्तर पर संवर्धित कर रहा था। यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया में उसमें मौजूद एक खास प्रकार के यूरेनियम की मात्रा बढ़ाई जाती है।
परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए आमतौर पर इससे कम स्तर के संवर्धन की जरूरत होती है, जबकि परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम की शुद्धता करीब 90 फीसदी मानी जाती है। अमेरिकी नोटिस के अनुसार, ईरान दुनिया का एकमात्र ऐसा गैर-परमाणु हथियार संपन्न देश है, जो यूरेनियम का संवर्धन इतनी ऊंची शुद्धता तक कर रहा है।
नोटिस में यह आशंका भी जताई गई है कि यदि ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को और अधिक संवर्धित किया जाता है, तो उससे कई परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त सामग्री हासिल हो सकती है। इसी वजह से अमेरिका ईरान के परमाणु ढांचे, वैज्ञानिकों और उससे जुड़े नेटवर्क के बारे में गोपनीय जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है।
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