पाकिस्तान के प्लानिंग मिनिस्टर अहसान इकबाल ने भारत के साथ संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े दो अहम मुद्दों पर बयान दिया है। उन्होंने एक ओर सिंधु जल संधि को भारत द्वारा एबेयंस में रखे जाने को लेकर चिंता जताई और आरोप लगाया कि भारत अपने भौगोलिक लाभ का इस्तेमाल पानी को पाकिस्तान के खिलाफ हथियार के तौर पर कर सकता है। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने दक्षिण एशिया में भारत की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि क्षेत्र के बेहतर तरीके से काम करने के लिए भारत की भागीदारी जरूरी है।
पानी को हथियार बनाने का लगाया आरोप
अहसान इकबाल ने कहा कि भारत एक तटवर्ती देश है। पाकिस्तान में आने वाली कई नदियों का उद्गम भारत की ओर से होता है। ऐसे में भारत के पास भौगोलिक बढ़त है। उनका आरोप है कि भारत इस स्थिति का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान की जल आपूर्ति को प्रभावित करने के लिए कर सकता है। इकबाल के मुताबिक, पाकिस्तान के सामने अब यह खतरा मौजूद है कि भारत पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है।
भारत की केंद्रीय भूमिका को माना
अहसान इकबाल ने अपने दूसरे बयान में दक्षिण एशिया में भारत की भौगोलिक स्थिति और प्रभाव को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित है, जबकि बाकी देश उसके आसपास हैं। उन्होंने माना कि दक्षिण एशिया को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत का आकार, अर्थव्यवस्था और भौगोलिक स्थिति उसे क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बनाती है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान समेत कई देश सीधे तौर पर भारत से भौगोलिक और आर्थिक रूप से जुड़े हैं।
दूसरी तरफ भारत की अहमियत स्वीकार
इकबाल के दोनों बयानों को साथ देखा जाए तो पाकिस्तान के रुख में एक विरोधाभास भी नजर आता है। एक तरफ वह भारत पर पानी को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए भारत की भूमिका को जरूरी मान रहा है। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से पानी के बंटवारे का आधार रही है। मौजूदा तनाव ने इस समझौते को दोनों देशों के बीच एक बार फिर प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
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