चीन में दशकों पहले शुरू किए गए बड़े पैमाने के वृक्षारोपण अभियान पर आई नई रिसर्च ने चौंकाने वाले नतीजे सामने रखे हैं। अध्ययन के मुताबिक, इस अभियान के तहत लगाए गए करीब 66 अरब पौधे आसपास के प्राकृतिक जंगलों की तुलना में काफी तेज गति से बढ़ रहे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह बढ़त मुख्य रूप से पौधों की कम उम्र और वातावरण में बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड से जुड़ी है।
सैटेलाइट डेटा और जंगलों के अध्ययन से मिले नतीजे
वैज्ञानिकों ने चीन के अलग-अलग क्षेत्रों के जंगलों और सैटेलाइट से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया। उनका उद्देश्य यह समझना था कि लगाए गए जंगल प्राकृतिक जंगलों की तुलना में अधिक तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि कम उम्र के पौधे स्वाभाविक रूप से तेजी से बढ़ते हैं। हालांकि, पौधों की उम्र, मौसम और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखने के बाद भी लगाए गए जंगलों की वृद्धि प्राकृतिक जंगलों से करीब 4.6 प्रतिशत अधिक रही।
कार्बन डाइऑक्साइड से मिलती है शुरुआती बढ़त
शोधकर्ताओं के अनुसार, वातावरण में बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) इसकी एक प्रमुख वजह हो सकती है। कम उम्र के पौधे इस गैस का अधिक उपयोग कर तेजी से नई पत्तियां और हरियाली विकसित करते हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी बताया गया है कि यह बढ़त स्थायी नहीं रहती। पौधों की उम्र बढ़ने के साथ उनकी वृद्धि की गति धीरे-धीरे कम होने लगती है। स्टडी के मुताबिक, लगाए गए पौधे 30 से 40 वर्ष की उम्र तक सबसे तेज बढ़ते हैं, जिसके बाद उनकी विकास दर घटने लगती है।
प्राकृतिक जंगलों का महत्व बना रहेगा
अध्ययन में कहा गया है कि प्राकृतिक जंगल भले ही धीमी गति से बढ़ते हों, लेकिन वे सैकड़ों वर्षों तक कार्बन को अपने भीतर रखने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा इनमें अलग-अलग प्रकार के पौधे, पक्षी, जानवर और अन्य जीव रहते हैं, जिससे जैव विविधता को भी संरक्षण मिलता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नए पौधे लगाना जलवायु परिवर्तन से निपटने में मददगार है, लेकिन इससे प्राकृतिक जंगलों की भरपाई नहीं की जा सकती। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए नए वृक्ष लगाने के साथ-साथ पुराने और प्राकृतिक जंगलों को बचाना भी उतना ही जरूरी है।
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