Ram Mandir Donation Scam Case: अयोध्या के श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की चोरी से जुड़े मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। इस मामले में 13 जुलाई को चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी। अदालत के सामने इस मुद्दे से जुड़ी कुल तीन याचिकाएं की गई हैं, जिनमें दान के प्रबंधन और गड़बड़ी की जांच को लेकर कई अहम मांगें उठाई गई हैं।
तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ करेगी। इस मामले को लेकर वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी, वकील अजय कुमार राय और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
CBI जांच और SIT गठन की मांग
याचिकाओं में दान गड़बड़ी की जांच CBI को सौंपने और विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई है। इसके अलावा मंदिर में दान के प्रबंधन से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट्स की एक समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है, ताकि पूरी व्यवस्था का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जा सके।
फोरेंसिक ऑडिट और लाइव जानकारी की भी मांग
याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से राम मंदिर ट्रस्ट का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए। साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं से आने वाले दान की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव करने की व्यवस्था लागू करने का अनुरोध भी सुप्रीम कोर्ट से किया गया है।
चढ़ावे को ट्रस्ट की पवित्र संपत्ति घोषित करने की अपील
एक याचिका में अदालत से यह मांग भी की गई है कि भक्तों द्वारा चढ़ाया गया पूरा चढ़ावा ट्रस्ट की पवित्र संपत्ति घोषित किया जाए। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह ट्रस्ट के पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए जरुरी दिशा-निर्देश जारी करे।
13 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें
अब इस मामले में सभी की नजर 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत इस दौरान CBI जांच, SIT गठन, फोरेंसिक ऑडिट, विशेषज्ञ समिति के गठन और दान व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़ी मांगों पर अपना रुख स्पष्ट कर सकती है।
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