Shri Badrinath Temple Donation Controversy: श्री बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़े विवाद को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं करेगी और जांच समिति ईमानदारी से पूरे मामले की जांच कर दूध का दूध, पानी का पानी करेगी।
आस्था के केंद्र से जुड़ा है मामला
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम करोड़ों सनातनियों की आस्था और श्रद्धा का पवित्र केंद्र है। ऐसी पवित्र जगह पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से सरकार ने जांच समिति का गठन किया है, ताकि पूरे मामले की सही से जांच हो सके और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
राजनीतिक बयानबाजी पर क्या बोले CM?
मामले को लेकर प्रदेश में जारी राजनीतिक बयानबाजी पर मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास कोई मुद्दा नहीं होता, वे केवल राजनीति करने के लिए आस्था के केंद्रों को भी अपने विवादों में शामिल कर लेते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह की राजनीति से आस्था स्थलों का सम्मान और वैभव प्रभावित होता है। उन्होंने दोहराया कि सरकार इस मामले में पूरी गंभीरता से कार्रवाई करेगी और किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरती जाएगी।
सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति
चढ़ावा मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने गढ़वाल मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और स्वास्थ्य विभाग के निदेशक जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है। धर्मस्व सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल की ओर से जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में चढ़ाये जाने वाले दान-चढ़ावे से जुडी गड़बड़ी की जांच करेगी।
15 दिन में सरकार को देनी होगी रिपोर्ट
सरकार की ओर से गठित समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे मामले की जांच पूरी कर 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे। इससे पहले श्री बदरी-केदार मंदिर समिति ने भी इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। अब सरकार की उच्च स्तरीय समिति पूरे मामले की अलग से जांच करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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