PM Modi Australia Visit: PM मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर ऑस्ट्रेलिया पहुंच गए हैं। गुरुवार को वह भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम में शामिल हुए, जहां उन्होंने दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों को संबोधित किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करने के साथ संभावित ट्रेड डील पर बातचीत होने की संभावना है।
मेलबर्न में भारतीयों से करेंगे मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में करीब 40 हजार प्रवासी भारतीयों के शामिल होने का अनुमान है। प्रधानमंत्री यहां भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद 11 जुलाई को वो न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।
ट्रेड-डिफेंस सहयोग पर रहेगा फोकस
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग को लेकर अहम समझौते होने की संभावना है। दोनों देशों के प्रधानमंत्री कई प्रमुख कारोबारियों से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि व्यापार और निवेश के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने पर भी बातचीत होगी।
ECTA से बढ़ा दोनों देशों का व्यापार
ऑस्ट्रेलिया-इंडिया इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट (ECTA) लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात करीब 4 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। ECTA, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है, जिस पर 2 अप्रैल 2022 को हस्ताक्षर हुए थे और यह 29 दिसंबर 2022 से लागू है। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया ने अधिकांश भारतीय चीजों पर आयात शुल्क खत्म या काफी कम कर दिया है, जबकि भारत ने भी कई ऑस्ट्रेलियाई चीजों पर शुल्क कम करने पर सहमति दी है।
CEO फोरम में दिखी आर्थिक साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में भाग लिया। इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर बातचीत हुई।
यूरेनियम सहयोग भी रहेगा अहम
भारत स्वच्छ ऊर्जा और साल 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हालांकि देश में यूरेनियम का घरेलू भंडार सीमित है और सभी परमाणु रिएक्टरों की जरूरत पूरी नहीं कर पाता। ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए एक बड़ा साझेदार बन सकता है।
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