हरियाणा(Haryana) सरकार ने वृद्धावस्था सम्मान भत्ता प्राप्त करने वाले बुजुर्गों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक जरूरी कदम उठाया है। परिवार पहचान पत्र (PPP) में जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया के बीच यह आशंका जताई जा रही थी कि जिन लोगों के पास उम्र साबित करने के जरूरी दस्तावेज नहीं हैं उनकी पेंशन पर इसका असर पड़ सकता है। अब सरकार ने ये स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ दस्तावेजों की कमी के चलते किसी भी पात्र लाभार्थी की पेंशन बंद नहीं की जाएगी।
जन्मतिथि सत्यापन के लिए नई व्यवस्था
सरकार ऐसे बुजुर्गों के लिए वैकल्पिक सत्यापन का तरीका तैयार कर रही है जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र या अन्य मान्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इस नई व्यवस्था के तहत अगर किसी बुजुर्ग की जन्मतिथि प्रमाणित नहीं हो पा रही है तो परिवार पहचान पत्र में दर्ज उनके सबसे बड़े बेटे या बेटी के दर्ज किए गए जन्म रिकॉर्ड के आधार पर उनकी आयु का सत्यापन किया जाएगा।
हालांकि, इसके लिए यह जरूरी होगा कि बड़ी संतान का नाम परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो और उसकी जन्मतिथि पहले से प्रमाणित हो। इस नई व्यवस्था से खास तौर पर ग्रामीण इलाकों के हजारों बुजुर्गों को फायदा मिलने की उम्मीद है जहां पुराने सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।
पेंशन पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने साफ किया है कि जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया का उद्देश्य सिर्फ रिकॉर्ड को वैलिड बनाना है। जब तक सत्यापन पूरा नहीं हो जाता तब तक पात्र लाभार्थियों को पहले की तरह नियमित रूप से पेंशन मिलती रहेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र व्यक्ति केवल सत्यापन लंबित होने की वजह से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
सत्यापन के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत
वर्तमान नियमों के मुताबिक, जन्मतिथि सत्यापन के लिए पांच दस्तावेज मान्य हैं – जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं कक्षा की रिपोर्टकार्ड, वर्ष 2019 तक बना मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO)। जिन लाभार्थियों के पास इनमें से कोई दस्तावेज है उन्हें सरकार द्वारा भेजे गए संदेश के अनुसार 30 दिनों के भीतर उसे परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण ने वर्ष के अंत तक सभी जरूरी जानकारियों के सत्यापन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी की पेंशन रोकना नहीं बल्कि रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना है ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के पात्र नागरिकों तक पहुंचता रहे।