छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में प्रस्तावित MLA कॉलोनी के लिए जमीन खाली कराने के दौरान प्रशासन ने 80 से अधिक मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के बाद दर्जनों परिवार बेघर हो गए। जहां कभी पक्के घर थे, वहां अब मलबा और खुले आसमान के नीचे रखा घरेलू सामान नजर आ रहा है।
56 एकड़ जमीन पर चला अतिक्रमण हटाओ अभियान
जिला प्रशासन के अनुसार, करीब 56 एकड़ सरकारी जमीन को खाली कराने के लिए यह अभियान चलाया गया। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी चरागाह है और वहां लंबे समय से अतिक्रमण था। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को कई बार नोटिस भी जारी किए गए थे। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर से एक-एक कर मकानों को हटाया गया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते इलाके में बैरिकेडिंग की गई और आम लोगों की आवाजाही सीमित रही।
वर्षों से रह रहे – गांव वालों का तर्क
सभी परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं। उनका दावा है कि उनके पास बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएं थीं और कई परिवारों को सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिला था। ऐसे में उनका सवाल है कि अगर जमीन पर उनका कब्जा अवैध था तो वर्षों तक सरकारी सुविधाएं कैसे मिलती रहीं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विधायक कॉलोनी के लिए बड़ी संख्या में परिवारों को बेघर किया गया और पुनर्वास की प्रक्रिया पर्याप्त नहीं थी। वहीं, बीजेपी के कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने इन आरोपो को खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई कानून के तहत की गई है और किसी भी पात्र परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने प्रभावित लोगों के पुनर्वास का भरोसा भी दिया है।
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