इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने बुधवार को स्वदेशी तकनीक से विकसित कम लागत वाले टैक्टिकल एयरोस्टेट का सफल प्रदर्शन किया। इस परियोजना को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और एक भारतीय स्टार्टअप के सहयोग से तैयार किया गया है। इसका लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में विदेश तकनीक पर भारत की निर्भरता कम करना है।
20 किलोमीटर की ऊंचाई तक करेगा निगरानी
IIT दिल्ली के प्रोफेसर भूपेन सिंह भटोला ने बताया कि यह एयरोस्टेट हवा से हल्का एक विशेष गुब्बारा है, जिसे 20 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर तैनात किया जा सकता है। इस पर कैमरा, इंफ्रारेड (IR) डिटेक्टर, कम्युनिकेशन सिस्टम और अन्य निगरानी उपकरण लगाए जा सकते हैं, जिससे बड़े इलाके की निगरानी संभव होगी। उन्होंने कहा कि अब तक इस तरह के सिस्टम मुख्य रूप से विदेशों, खासकर अमेरिका से आयात किए जाते थे। DRDO की पहल पर इसे भारत में विकसित करने के लिए IIT दिल्ली ने विशेष मैटेरियल विकसित की और इस तकनीक को आगे बढ़ाने में एक भारतीय स्टार्टअप ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
#WATCH | Delhi: IIT-Delhi demonstrates indigenous low-cost tactical aerostat developed with DRDO and a startup
Visuals of aerostat with camera deployment pic.twitter.com/Q2LJkiDdny
— ANI (@ANI) July 1, 2026
ड्रोन से कैसे है अलग?
प्रोफेसर भटोला के मुताबिक, टैक्टिकल एयरोस्टेट और ड्रोन में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं।
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यह ड्रोन की तुलना में काफी अधिक समय तक हवा में रह सकता है।
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भारी पेलोड ले जाने में सक्षम है।
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निगरानी के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और सामान की सप्लाई जैसे कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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संचालन लागत अपेक्षाकृत कम है और बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी कर सकता है।
रक्षा के साथ नागरिक उपयोग की भी संभावना
IIT दिल्ली का कहना है कि फिलहाल यह तकनीक रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है, लेकिन भविष्य में इसका उपयोग आपदा प्रबंधन, संचार नेटवर्क, निगरानी, कृषि और अन्य नागरिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। यह परियोजना IIT दिल्ली, DRDO और एक भारतीय स्टार्टअप के संयुक्त प्रयास का परिणाम है और इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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