प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में दिल्ली की महत्वाकांक्षी 6-लेन द्वारका टनल परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना पर 6,969.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक बनेगा सीधा संपर्क
करीब 8.1 किलोमीटर लंबी यह टनल द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला रास्ते से जोड़ेगी। इसके बनने से पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा ज्यादा तेज और सुगम होगी। इस परियोजना से गुरुग्राम, द्वारका, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डा और पश्चिमी दिल्ली से दक्षिण दिल्ली जाने वाले लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत
सरकार का कहना है कि नई टनल बनने के बाद राजधानी दिल्ली के कई रास्तों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इससे यात्रा का समय घटेगा और लोगों को लंबे जाम से राहत मिलेगी। परियोजना की एक खास बात यह है कि इसका निर्माण दक्षिणी रिज फॉरेस्ट को सुरक्षित रखते हुए किया जाएगा। सरकार के अनुसार, टनल का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि दिल्ली के इस महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
अश्विनी वैष्णव ने बताई परियोजना की खासियत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह परियोजना लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करेगी। उन्होंने बताया कि टनल शिव मूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर वसंत कुंज, नेल्सन मंडेला मार्ग और आगे एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए DND फ्लाईवे तक पहुंचेगी। इससे दिल्ली में एक नया यातायात कॉरिडोर विकसित होगा। वैष्णव ने कहा कि परियोजना के दौरान रिज क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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