Yamuna Water: यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 के समझौते को लागू करने पर 32 साल बाद सहमति बन गई है। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस बंटवारे से जुड़े मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) पर सिग्नेचर करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी मौजूद रहेंगे। समझौते पर रविवार को दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में सहमति बनी थी।
दो घंटे चली बैठक में बनी सहमति
रविवार को बीकानेर हाउस में राजस्थान और हरियाणा के सीनियर ऑफिसर के बीच करीब दो घंटे तक बैठक चली। बैठक में राजस्थान के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर भुवन भास्कर तथा हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल और चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह शामिल हुए। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके बैठक से जुड़े।
हरियाणा ने कई जगहों से पानी की रखी मांग
समझौते के तहत हरियाणा ने दानोदा कलां से 10 क्यूसेक, नयागांव के पास सारसौद डिस्ट्रीब्यूटी से 80 क्यूसेक, चौधरी माइनर पर हिंदवान से 70 क्यूसेक, सरसना माइनर पर पाट्टन से 20 क्यूसेक, सेगा नरार से 2 क्यूसेक, कैथल टाउन के पास पेओदा से 43 क्यूसेक और कैथल टाउन के पास चांदना मानस रोड से 41.83 क्यूसेक पानी की मांग की है। इसके अलावा एक अलग जगह से भी पानी लिया जाएगा। साथ ही हरियाणा हाश्यावास के तीन रिजर्वायर में से एक से जरूरत के अनुसार पानी ले सकेगा।
हाईब्रिड मोड पर तैयार होगी पाइपलाइन
हथिनी कुंड बैराज से राजगढ़, चूरू के जलाशय तक भूमि स्तर में करीब 110 मीटर का अंतर है और राजगढ़ नीचे मौजूद है। ऐसे में पानी हथिनी कुंड से ग्रेविटी के जरिए राजगढ़ तक पहुंचेगा। वहीं, पाइपलाइन को हाईब्रिड मोड पर बनाया जाएगा। इसके तहत पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे ताकि जल कम होने पर पानी को पंप से राजगढ़ तक पहुंचाया जा सके।
SPV कंपनी पूरे प्रोजेक्ट को करेगी मैनेज
प्रोजेक्ट समय से पूरा हो ये देखने के लिए पहले संयुक्त बोर्ड बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन अब दोनों राज्य स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV ) कंपनी के बनाने पर राजी हो गए हैं। कंपनी को बनाने से जुड़े मुद्दे पर आगे बात की जाएगी। यही कंपनी पूरी परियोजना को देखेगी । परियोजना का पूरा खर्च राजस्थान सरकार उठाएगी, जबकि केंद्र सरकार से भी इसमें सहयोग लेने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य में किशाऊ, लखवार, रेणुकाजी से राजस्थान के हिस्से का पानी भी इन्हीं पाइपलाइन के जरिए राज्य तक पहुंचाया जा सकेगा।
1994 के समझौते के आधार पर मिलेगा पानी
दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी है कि फिलहाल 1994 के समझौते को ही लागू किया जाएगा। हरियाणा ने बदली परिस्थितियों और बढ़ती जरूरतों के अनुसार जल बंटवारे का प्रस्ताव रखा था, लेकिन राजस्थान की ओर से समझौते को लागू करने पर जोर दिया गया। इसके बाद दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए। समझौते के अनुसार राजस्थान को 1917 क्यूसेक पानी मिलेगा। हथिनी कुंड से चूरू के हाश्यावास तक 3.6 मीटर व्यास वाली तीन पाइपलाइन बिछाई जाएंगी।
इन जिलों से होकर गुजरेगी पाइपलाइन
प्रस्तावित पाइपलाइन हरियाणा के यमुनानगर, कुरूक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार जिलों से होकर गुजरेगी। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद वित्तीय संसाधन जुटाए जाएंगे। इसके बाद पाइपलाइन के लिए भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्यों के टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे, जिसके बाद परियोजना पर काम शुरू होगा।
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