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कोलकाता के ‘वायलिन मैन’ की बदली किस्मत, सोशल मीडिया पर वायरल हुई 80 साल के भगवान मल्लिक, आनंद महिंद्रा ने बढ़ाया मदद का हाथ

छह दशकों से ज़्यादा समय से कोलकाता की सड़कों पर एक बुज़ुर्ग वायलिन वादक अपनी कला से संगीत बिखेर रहे हैं। वे शोहरत के लिए नहीं, बल्कि अपनी आजीविका चलाने के लिए अपने हुनर ​​का इस्तेमाल करते हैं। आज 80 वर्षीय भगवान मल्लिक की कहानी ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है और देश भर से उन्हें समर्थन मिल रहा है।

उनकी कहानी से प्रभावित होने वालों में उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी शामिल हैं। संगीतकार के जीवन पर बने एक वायरल वीडियो को देखने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से मदद करने की इच्छा जताई।

आनंद महिंद्रा ने वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दी

ऑनलाइन वीडियो के वायरल होने के बाद, आनंद महिंद्रा ने इसे X पर शेयर किया और कहा कि वे इस अनुभवी संगीतकार की मदद करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ओरिजिनल क्लिप में इस बात की जानकारी नहीं थी कि लोग मल्लिक तक कैसे पहुँच सकते हैं या उनकी मदद कैसे कर सकते हैं।

उनकी पोस्ट पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने तेज़ी से प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने वायलिन वादक के बारे में जानकारी साझा की, जिससे उन्हें मदद करने के इच्छुक लोगों से जुड़ने में मदद मिली।

संगीत को समर्पित जीवन

भगवान मल्लिक का सफ़र संघर्ष और कठिनाइयों से भरा रहा है। वायरल वीडियो के अनुसार, कम उम्र में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था और अपने पिता से ही वायलिन बजाना सीखा था। पिता के निधन के बाद संगीत ही उनकी आजीविका का एकमात्र ज़रिया बन गया।

मल्लिक दशकों से कोलकाता की सड़कों पर वायलिन बजाते रहे हैं और अपनी व अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए थोड़ी-बहुत कमाई करते रहे हैं। बढ़ती उम्र, कमज़ोर होती नज़र और सालों से इस्तेमाल हो रहे टूटे-फूटे वायलिन के बावजूद, वे गुज़ारा करने के लिए रोज़ाना वायलिन बजाते रहे।

बहुत कम आय में गुज़ारा

बताया जाता है कि 80 वर्षीय मल्लिक कई दिनों में लगभग 100 रुपये कमा पाते हैं, जो मुश्किल से ही बुनियादी खर्चों को पूरा करने के लिए काफ़ी होते हैं। वे अपनी पत्नी के साथ किराए के घर में रहते हैं, सार्वजनिक जगहों पर वायलिन बजाते समय उनकी पत्नी अक्सर उनके साथ होती हैं।

कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में रहने वाले लोग और रोज़ाना आने-जाने वाले लोग शाम के समय न्यू टाउन बस स्टैंड, DLF सबवे और न्यू टाउन आर्ट स्ट्रीट जैसी जगहों के पास इस बुज़ुर्ग संगीतकार को वायलिन बजाते हुए देखते रहे हैं।

कंटेंट क्रिएटर ने उनकी कहानी को सबके सामने लाने में मदद की

बदलाव तब आया जब कंटेंट क्रिएटर आराधना चटर्जी ने मल्लिक के जीवन को रिकॉर्ड किया और उसे ऑनलाइन शेयर किया। उनके वीडियो ने हज़ारों दर्शकों को इस संगीतकार के संघर्ष, समर्पण और अपनी कला के प्रति अटूट निष्ठा से परिचित कराया। उन्होंने कैफ़े, इवेंट ऑर्गनाइज़र और कम्युनिटी स्पेस से भी अपील की कि वे मल्लिक को परफ़ॉर्म करने के लिए बुलाने पर विचार करें। उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे या कुछ समय के लिए मिलने वाले मौकों से भी उनकी स्थिति में काफ़ी सुधार हो सकता है।

डोनेशन और नए वायलिन से जगी उम्मीद

ऑनलाइन लोगों का रिस्पॉन्स बहुत तेज़ी से और उत्साह बढ़ाने वाला रहा। बाद में मिली जानकारी के मुताबिक, चटर्जी ने बताया कि सपोर्टर्स ने इस अनुभवी म्यूज़िशियन के लिए लगभग 1 लाख रुपये जमा करने में मदद की। उन्होंने उन्हें एक नया वायलिन भी दिया, ताकि वे उस पुराने और घिसे-पिटे वायलिन की जगह इसका इस्तेमाल कर सकें जिसे वे सालों से बजा रहे थे। यह मल्लिक की ज़िंदगी का एक अहम पल था, जिसने उन्हें न सिर्फ़ आर्थिक मदद दी, बल्कि उनके म्यूज़िकल टैलेंट को नई पहचान भी दिलाई।

 

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