तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर अपनी सरकार की स्थिरता साबित कर दी। सदन में हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान विजय सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 22 विधायकों ने मतदान किया। पांच सदस्य मतदान से अनुपस्थित रहे। विश्वास प्रस्ताव पर मतदान ऐसे समय हुआ जब राज्य की राजनीति में सरकार के भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि संख्या बल के दम पर विजय सरकार ने आसानी से बहुमत साबित कर दिया।
फ्लोर टेस्ट से पहले सहयोगी दलों के साथ बैठक
विश्वास मत से पहले मुख्यमंत्री विजय ने कांग्रेस समेत सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक की थी। बैठक में सहयोगी दलों ने TVK सरकार को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया। दूसरी ओर AIDMK प्रमुख एडप्पाडी के पलानीस्वामी ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी सरकार के खिलाफ वोट करेगी।
DMK के वॉकआउट से बदला गणित
फ्लोर टेस्ट के दौरान सबसे बड़ा घटनाक्रम तब हुआ जब विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी के बाद DMK विधायक सदन से वॉकआउट कर गए। DMK के पास 59 विधायक हैं। उनके बाहर जाने के बाद सदन में बहुमत का आंकड़ा घटकर 88 रह गया, जिससे विजय सरकार को बहुमत साबित करने में आसानी हो गई।
सदन में हुआ हंगामा
फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में उस समय हंगामा बढ़ गया जब अध्यक्ष ने बागी विधायक एसपी वेलुमणि को बोलने की अनुमति दी। AIDMK विधायकों ने इसका विरोध करते हुए TVK पर विपक्ष में टूट को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। वेलुमणि ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय को जनादेश मिला है और पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें समर्थन देने का फैसला किया है। इसके बाद सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
BJP को लेकर भी छिड़ी बहस
फ्लोर टेस्ट के दौरान पीएमके विधायक सौम्या अंबुमणि ने आरोप लगाया कि विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शासन के मुद्दों से हटकर बीजेपी विरोधी मंच बनती जा रही है। उन्होंने राज्य में शराब की दुकानों और अवैध शराब बिक्री को लेकर भी सरकार को घेरा।
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