तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड शिक्षक और उनकी पत्नी से ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 82.40 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी और CBI अफसर बताकर दंपति को मानसिक रूप से इतना डरा दिया कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी, एफडी और लोन तक के पैसे ट्रांसफर कर दिए। मामले की शिकायत महबूबाबाद टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है और पुलिस जांच में जुट गई है।
आधार कार्ड और गिरफ्तारी वारंट का बनाया डर
पीड़ित परिवार के अनुसार, 11 अप्रैल को एक फोन कॉल आया जिसमें कॉलर ने खुद को एयरटेल कंपनी का कर्मचारी बताकर बात करने लगा। उसने दावा किया कि रिटायर्ड शिक्षक के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कई उत्पीड़न मामलों में नाम सामने आया है और उनका मोबाइल नंबर बंद किया जा सकता है। इसके बाद कॉल को एक पुलिस अधिकारी से जोड़ दिया गया। व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने व्यक्ति ने कहा कि शिक्षक के आधार कार्ड से मुंबई में बैंक खाता खोला गया है, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी ने 75 लाख रुपये ट्रांसफर किए हैं।
“गिरफ्तारी वारंट” दिखाकर बढ़ाया दबाव
इसके बाद ठगों ने दंपति को वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया और दावा किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई होने वाली है। कुछ देर बाद में एक अन्य व्यक्ति कॉल में शामिल हुआ, जिसने खुद को CBI अधिकारी बताया, फिर आरोपियों ने दंपति को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि मामले की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दी जाए।
FD तोड़ी, गोल्ड और LIC लोन तक लिया
ठगों द्वारा लगातार मानसिक दबाव के चलते दंपति ने अलग-अलग माध्यमों से बड़ी रकम जुटानी शुरू कर दी। उन्होंने बैंक खातों से लाखों रुपये निकाले, फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ी और गोल्ड लोन तथा LIC लोन भी लिया। पुलिस के अनुसार, दंपति ने कई किश्तों में RTGS के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। 15 अप्रैल को 49 लाख रुपये, 18 अप्रैल को 22.22 लाख रुपये और 22 अप्रैल को 11.22 लाख रुपये भेजे गए। कुल मिलाकर ठगों ने 82.40 लाख रुपये हासिल कर लिए।
“जांच पूरी होने पर पैसा लौटाने” का दिया भरोसा
हर ट्रांजैक्शन के बाद ठग पीड़ितों को भरोसा दिलाते रहे कि रकम केवल “लीगल वेरिफिकेशन” के लिए ली जा रही है और जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे, लेकिन 3 मई के बाद जब दंपति ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी नंबर बंद मिले। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।
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