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सेंट्रल रिज के 673 हेक्टेयर को आरक्षित वन का दर्जा, प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में दिल्ली सरकार की ऐतिहासिक पहल…

दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार की दिशा में सरकार ने एक अहम और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार(Delhi Government) ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत सेंट्रल रिज के लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित कर दिया है। यह इलाका वन विभाग के पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत आता है और सरदार पटेल मार्ग से लेकर राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास तक फैला हुआ है।

“ग्रीन लंग्स” के रूप में जाना जाता है सेंट्रल रिज

सरकार का कहना है कि इस फैसले से राजधानी की पर्यावरणीय सुरक्षा और प्राकृतिक विरासत को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही लंबे समय से लंबित इस क्षेत्र को कानूनी संरक्षण प्रदान करने की प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। सेंट्रल रिज को दिल्ली के “ग्रीन लंग्स” के रूप में जाना जाता है जो शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सरकार ने बनाई योजना 

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 1994 में रिज क्षेत्रों की प्रारंभिक अधिसूचना के बाद भी इन्हें पूर्ण कानूनी दर्जा नहीं मिल सका था। वर्तमान सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल करते हुए इस क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किया है। इसके बाद यहां उपलब्ध उपयुक्त और खाली भूमि पर देसी एवं पर्यावरण हितैषी पौधों के बड़े पैमाने पर रोपण की योजना भी बनाई गई है।

सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल प्रदूषण नियंत्रण और भूजल संरक्षण में सहायक होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संतुलित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

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