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आज है सौभाग्य और समृद्धि का सुनहरा पर्व, जानें क्यों माना जाता है अक्षय तृतीया का दिन इतना खास…

आज, 19 अप्रैल को पूरे देश में अक्षय तृतीया(Akshaya Tritiya) का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है और इसे सौभाग्य, समृद्धि तथा निरंतर सफलता का प्रतीक कहा गया है। ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है जो कभी समाप्त या नष्ट न हो। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, पूजा-पाठ, जप और शुभ कार्यों का फल कभी क्षीण नहीं होता, बल्कि वह सदैव बढ़ता ही रहता है।

क्या है अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त ?

  • पंचांग के अनुसार आज का दिन पूजा और खरीदारी के लिए समय विशेष रूप से शुभ माना गया है।

  • पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक

  • सोना खरीदने का शुभ समय: सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म के अत्यंत पवित्र और मंगलकारी पर्वों में गिना जाता है। विश्वास है कि इस दिन किया गया कोई भी पुण्य कार्य अक्षय फल देता है, जिसका मतलब है कि उसका प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता।

क्या कहती है पौराणिक कथा ?

एक प्राचीन कथा के अनुसार धर्मदास नाम का एक धर्मनिष्ठ व्यक्ति था, जो सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता था। वह अपने बड़े परिवार और जीवन की कठिन परिस्थितियों के कारण अक्सर चिंतित रहता थ। लेकिन उसने कभी अपने धार्मिक कर्तव्यों को नहीं छोड़ा और एक दिन उसे अक्षय तृतीया के महत्व के बारे में ज्ञात हुआ, जिसके बाद उसने इस दिन गंगा स्नान कर विधिपूर्वक देवी-देवताओं की आराधना की। इस अवसर पर धर्मदास ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनेक वस्तुओं का दान किया, जैसे गुड़-चना, पंखा, जल से भरे घड़े, जौ, गेहूं, नमक, सत्तू, दही, चावल और वस्त्र आदि, जिन्हें उसने ब्राह्मणों को अर्पित किया।

भले ही उसके जीवन में अनेक कठिनाइयां थीं, परिवार की जिम्मेदारियां और स्वास्थ्य समस्याएं थीं, फिर भी उसने दान-पुण्य का मार्ग नहीं छोड़ा। कथा के अनुसार, उसके इस सत्कर्म और निष्ठा के कारण उसे अगले जन्म में एक समृद्ध और शक्तिशाली राजा के रूप में जन्म मिला। वह कुशावती का शासक बना और अत्यंत वैभवशाली जीवन जीने के बावजूद धर्म और दान के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुआ। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन इस कथा को श्रद्धापूर्वक सुनने और दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जो जीवन भर शुभ फल प्रदान करता है।

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