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महिला आरक्षण बिल पर सियासी बहस तेज, Kiran Bedi बोलीं-‘2029 के चुनावों में दिखेगा असर’

महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति में लगातार गर्माहट बनी हुई है और पक्ष-विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी बीच किरण बेदी(Kiran Bedi) का बड़ा बयान सामने आया है। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश होने के बावजूद जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके बाद यह चर्चा और तेज हो गई।

प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की अपनी प्रतिक्रिया

किरण बेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक और संवैधानिक परिस्थितियों जैसे – जनसंख्या, आर्थिक विकास, जनगणना और परिसीमन से जुड़े जटिल मुद्दों को देखते हुए 2029 से पहले संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू होना कठिन नजर आता है। उनके अनुसार, इसके लिए ऐसी सरकार की जरूरत होगी जिसके पास स्पष्ट दो-तिहाई बहुमत हो और जो सभी पहलुओं के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ सके।

निर्णायक वोट बैंक के रुप में उभरी महिलाएं 

उन्होंने यह भी कहा कि आज की महिला मतदाता अब सिर्फ प्रतीकात्मक वादों से संतुष्ट नहीं है, बल्कि वे देश के विकास और निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी चाहती हैं। उनका मानना है कि महिलाएं अब एक मजबूत और निर्णायक वोट बैंक के रूप में उभर चुकी हैं जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं।

इससे पहले भी बिल पर चर्चा शुरू होने से पहले किरण बेदी ने चेतावनी दी थी कि यदि संसद यह विधेयक पास करने में असफल रहती है, तो महिला मतदाता उन राजनीतिक दलों की ओर रुख कर सकती हैं जो 2029 तक संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का ठोस वादा करेंगे। उनके मुताबिक, अब महिलाएं केवल आश्वासनों पर नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव पर भरोसा करती हैं और वे देश के भविष्य को आकार देने में सीधी भूमिका निभाना चाहती हैं।

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