ईरान ने बीते 17 अप्रैल 2026 को स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज खोल दिया था। ईरान द्वारा यह फैसला लेबनान-इजराइल युद्धविराम के बाद लिया गया था। साथ ही इसकी घोषणा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा की गई थी। हालांकि ईरान ने आज 18 अप्रैल 2026 को बंद करने का दोबारा ऐलान किया है। ईरानी सेना ने इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर फिर से सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है। सैन्य कमांड की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर अपनी नेवल नाकाबंदी जारी रखकर वादाखिलाफी की है।
ईरान का सख्त रुख
ईरान ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका सभी जहाजों की आवाजाही बहाल नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण जारी रहेगा। बता दें कि ईरान ने यह फैसला इसलिए लिया था क्योंकि लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच सीजफायर के संकेत मिले थे। हालांकि कुछ ही समय बाद हालात बदल गए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, शनिवार सुबह से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पुरानी स्थिति में लाया गया और अब यह पूरी तरह सैन्य नियंत्रण में है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा होकर गुजरता है। इसलिए खाड़ी देशों से तेल और गैस निर्यात के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम माना जाता है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की रोक या तनाव का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।
तेल बाजार में बढ़ सकती है हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट के फिर बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आ सकता है। पिछले दो महीनों से क्षेत्रीय तनाव और नाकेबंदी के कारण पहले ही ऊर्जा बाजार दबाव में है। कई देशों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने और महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ताजा घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अब दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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