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रोज ₹4,000 करोड़ का नुकसान…US की होर्मुज में ‘नाकाबंदी’ से कहीं पूरी तरह बर्बाद न हो जाए ईरान? मंडरा रहा बड़ा खतरा!

US Blockade Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी ने ईरान की आर्थिक जीवनधारा पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। एक पॉलिसी एक्सपर्ट FDD के सीनियर फेलो मियाद मालेकी के अनुसार के अनुसार, अमेरिका के इस एक्शन के चलते ईरान को प्रतिदिन लगभग 435 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति और प्रशासन ने इसे ईरान पर दबाव बनाने का अहम कदम बताया।

वार्ता फेल होना ईरान के लिए बुरी खबर- जेडी वैंस

पाकिस्तान वार्ता का विफल होना और ट्रंप की प्रतिक्रिया
बीते सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 21 घंटे चली शांति वार्ता सफल नहीं हो पाई। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वैंस ने इसे ईरान के लिए बुरी खबर बताया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी लागू करने का ऐलान किया।

अमेरिकी नाकाबंदी का आर्थिक प्रभाव

विदेश नीति संस्थान FDD के सीनियर फेलो मियाद मालेकी ने बताया कि इस नाकाबंदी के प्रभाव से ईरान को निर्यात में लगभग 276 मिलियन डॉलर और आयात में 159 मिलियन डॉलर प्रतिदिन का नुकसान होगा। कुल मिलाकर रोजाना आर्थिक नुकसान करीब 435 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। मालेकी ने इसे ईरान की “ट्रेड लाइफलाइन” पर बड़ा संकट करार दिया।

फारस की खाड़ी और ईरानी निर्यात

ईरान के सालाना व्यापार का करीब 90% हिस्सा फारस की खाड़ी से होकर गुजरता है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग 109.7 अरब डॉलर है। निर्यात से होने वाली आय का 80% और देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग एक चौथाई हिस्सा तेल और गैस से आता है। वर्तमान में ईरान रोजाना करीब 15 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात कर रहा है, जिससे उसे प्रतिदिन लगभग 139 मिलियन डॉलर की आय हो रही है। अमेरिकी नाकाबंदी के लागू होने से यह आय तुरंत ठप हो जाएगी।

खार्ग द्वीप और निर्यात प्रभावित क्षेत्र

ईरानी कच्चे तेल के निर्यात का 92% हिस्सा संभालने वाला खार्ग द्वीप भी नाकाबंदी के प्रभावित क्षेत्र में आता है। इसका अर्थ है कि तेल निर्यात पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा और ईरान की विदेशी मुद्रा आय में गंभीर कमी आएगी।

 वैश्विक व्यापार पर असर

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि यह नाकाबंदी अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी समेत ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले या वहां से निकलने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट से होकर गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को रोका नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान के तेल और गैस क्षेत्र में आय में भारी कमी आएगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। मालेकी ने ट्विटर (X) पर लिखा कि निर्यात और आयात पर प्रतिदिन पड़ने वाले झटके से ईरान की वित्तीय और राजनीतिक स्थिति पर दबाव बढ़ेगा।

संभावित परिणाम और वैश्विक प्रभाव

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख तेल मार्गों में से एक है। अमेरिका की नाकाबंदी के कारण न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है। इस कदम से वैश्विक तेल कीमतों में भी वृद्धि की संभावना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होगा।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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