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दिल्ली मेट्रो की गोल्डन लाइन का 75% काम पूरा, फिर पर समयसीमा पर मंडराया खतरा, जानें क्या है वजह…

दिल्ली मेट्रो(Delhi metro) के फेज-4 की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गोल्डन लाइन कॉरिडोर राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली को एयरपोर्ट क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि निर्माण कार्य में लगातार प्रगति के बावजूद परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्य से पीछे चलती दिखाई दे रही है। ऐसे में इस रूट के शुरू होने का इंतजार कर रहे लाखों यात्रियों को फिलहाल कुछ और समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।

तुगलकाबाद से एरोसिटी तक प्रस्तावित यह मेट्रो कॉरिडोर लगभग 23.6 किलोमीटर लंबा है और इसके तहत 15 आधुनिक मेट्रो स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। यह लाइन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का एक अहम हिस्सा है जिससे दक्षिणी दिल्ली के कई घनी आबादी वाले क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

यह परियोजना क्यों है खास ? 

परियोजना की खास बात यह है कि इसका अधिकांश हिस्सा भूमिगत बनाया जा रहा है जबकि कुछ हिस्सों में डबल-डेकर संरचना तैयार की जा रही है। विशेष रूप से महरौली-बदरपुर रोड पर खानपुर तिराहे से संगम विहार तक का सेक्शन इंजीनियरिंग की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां सड़क और मेट्रो ढांचे को एक साथ विकसित किया जा रहा है जिससे भविष्य में यातायात व्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।

गोल्डन लाइन का निर्माण कार्य वर्ष 2020 में शुरू हुआ था। लेकिन शुरुआती वर्षों में कोरोना महामारी के कारण काम प्रभावित हुआ। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, आवश्यक स्वीकृतियों और निर्माण संबंधी तकनीकी चुनौतियों ने भी परियोजना की गति को धीमा किया। इन कारणों से निर्धारित समय के अनुसार काम आगे नहीं बढ़ पाया।

कब तक शुरू हो सकती है गोल्डन लाइन?

दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल तक कॉरिडोर का सिविल निर्माण कार्य 78 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका था। हालांकि केवल ढांचागत निर्माण पूरा होना ही पर्याप्त नहीं होता। मेट्रो संचालन शुरू करने से पहले ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग सिस्टम, बिजली आपूर्ति, सुरक्षा परीक्षण, संचार नेटवर्क और स्टेशन सुविधाओं जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जाते हैं।

इसी वजह से परियोजना की कुल प्रगति सिविल निर्माण की तुलना में कम दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और परिचालन से जुड़े कार्यों में समय लगना स्वाभाविक है और इन्हीं चरणों के कारण परियोजना की अंतिम समयसीमा प्रभावित हो सकती है।

कब तक खुलेगा कॉरिडोर ?

सूत्रों के मुताबिक, DMRC अब इस कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहा है। यदि निर्माण और परीक्षण कार्य अपेक्षित गति से आगे बढ़ते हैं तो कुछ हिस्सों में पहले मेट्रो सेवा शुरू की जा सकती है। वहीं पूरे कॉरिडोर को यात्रियों के लिए खोलने में वर्ष 2026 के अंत तक का समय लग सकता है।

गोल्डन लाइन के शुरू होने के बाद दक्षिण दिल्ली, संगम विहार, खानपुर, साकेत और एयरपोर्ट क्षेत्र के बीच यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और तेज हो जाएगी। फिलहाल परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसके पूरी तरह तैयार होने के लिए अभी कुछ महत्वपूर्ण चरणों को पार करना बाकी है।

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