NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं लाखों छात्रों के भविष्य और भरोसे पर असर डालती हैं, इसलिए मामले की जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
शिक्षा मंत्रालय से मांगा विस्तृत रोडमैप
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने शिक्षा मंत्रालय को अलग से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें यह बताने को कहा गया है कि राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कैसे सशक्त बनाया जाएगा?
NTA की क्षमता बढ़ाने पर जोर
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि हलफनामे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि एजेंसी के भीतर विशेषज्ञता विकसित करने, प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति करने और तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने की क्या योजना है। अदालत का मानना है कि परीक्षा संचालन से जुड़े संस्थागत ढांचे को मजबूत किए बिना ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा।
दोबारा न हो ऐसी घटना
अदालत ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं जैसे संवेदनशील मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता रोकने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को पूरी गंभीरता से काम करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोहराई जाती हैं, तो जवाबदेही तय करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं की मेहनत और उम्मीदों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
Read More
पुणे में जहरीली शराब पीने से 15 की मौत, CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा- पूरे नेटवर्क को करेंगे खत्म…

