सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हंगामा करने वाले एक याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू करने से इनकार कर दिया। बता दें कि याचिकाकर्ता ने अदालत में दस्तावेज फेंके, न्यायाधीशों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। साथ ही, मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणियां किया।
अदालत ने याचिकाकर्ता के व्यवहार पर जताई नाराजगी
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने कानूनी दलीलें रखने के बजाय असंगत और असंसदीय टिप्पणियां कीं। हालांकि, उसकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अवमानना की कार्यवाही या किसी अन्य कार्रवाई की शुरुआत नहीं करने का निर्णय लिया।
इलाहाबाद HC के फैसले में हस्तक्षेप से किया इनकार
जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के फैसले के खिलाफ दायर प्रबल प्रताप की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई कर रही थी। मामले के गुण-दोष पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कानूनी बहस की जगह लखनऊ के सहायक पुलिस आयुक्त के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देने की मांग की। इस पर जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा, “क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?” इसके कुछ ही देर बाद याचिकाकर्ता ने अदालत में कागज फेंक दिए और न्यायाधीशों के खिलाफ अपशब्द कहने लगा।
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