उत्तराखंड के चर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी (LUCC) घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच पूरी करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने देहरादून स्थित विशेष न्यायालय (BUDS एक्ट) में 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ आरोपों को लेकर चार्जशीट दाखिल की है। जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जिनमें से सैकड़ों करोड़ रुपये के दुरुपयोग का आरोप है।
CBI की जांच के मुताबिक, सोसायटी के पास किसी ठोस व्यवसाय या स्थायी आय स्रोत की जानकारी नहीं मिली। आरोप है कि पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किया जाता था। जांच एजेंसी ने इसे कथित तौर पर पोंजी स्कीम की तरह संचालित व्यवस्था बताया है। नए निवेशकों से पैसा आना कम होने के बाद भुगतान में रुकावट आई और कई लोगों की जमा पूंजी फंस गई।
2016 के बाद बदला सोसायटी का संचालन
मामले की जांच वर्ष 2025 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI को सौंपी गई थी। एजेंसी ने राज्य में दर्ज कई मामलों को अपने अधीन लेकर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि वर्ष 2012 में पंजीकृत इस सोसायटी का नियंत्रण वर्ष 2016 के बाद मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल के हाथों में आया था। इसके बाद उत्तराखंड में कई शाखाओं के माध्यम से कथित रूप से आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेश जुटाया गया।
जांच के घेरे में कई पदाधिकारी
चार्जशीट में सोसायटी से जुड़े पदाधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। CBI के अनुसार, कुछ आरोपियों की भूमिका शाखाओं से नकदी जुटाने, रकम के हस्तांतरण और वित्तीय लेनदेन में अनियमितताओं से जुड़ी पाई गई है।
आरोपियों पर उत्तराखंड प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट और अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनों के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
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