भारत-नेपाल सीमा से जुड़े उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों पेट्रोल और डीजल(Petrol and Diesel) की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो चुका है जबकि जहां ईंधन उपलब्ध है वहां लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह संकट रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहा है। सीमा से सटे बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जैसे जिलों में स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
कई जगह पेट्रोल पंप पूरी तरह बंद पड़े हैं। कुछ पंपों पर “पेट्रोल-डीजल उपलब्ध नहीं” के बोर्ड लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से तेल की सप्लाई सामान्य नहीं हो पा रही है जिसके कारण वाहनों को ईंधन के लिए भटकना पड़ रहा है। बलरामपुर के बॉर्डर इलाके में कई पेट्रोल पंपों पर ताला लगा मिला। कुछ जगहों पर पंपों को रस्सियों से बंद कर दिया गया ताकि वाहन अंदर न जा सकें। वहीं जिन पंपों पर तेल उपलब्ध था वहां सुबह से ही बाइक और कारों की लंबी कतारें नजर आईं।
नेपाल में महंगा ईंधन बना बड़ी वजह
इस संकट की सबसे बड़ी वजह भारत और नेपाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी अंतर माना जा रहा है। भारत में जहां पेट्रोल की कीमत लगभग 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास है वहीं नेपाल में यही पेट्रोल 135 रुपये या उससे अधिक में बिक रहा है। इसी तरह डीजल की कीमतों में भी बड़ा अंतर है।
कीमतों के इस फर्क के कारण सीमावर्ती इलाकों से बड़ी मात्रा में ईंधन की खपत बढ़ गई है। प्रशासन को आशंका है कि कई जगहों से तेल नेपाल की ओर भी पहुंच रहा है जिससे स्थानीय स्तर पर सप्लाई प्रभावित हो रही है।
अलर्ट मोड में प्रशासन
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। बॉर्डर के पास वाहनों की जांच की जा रही है ताकि बड़े पैमाने पर ईंधन की आवाजाही पर रोक लगाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि तेल कंपनियों से अतिरिक्त सप्लाई की मांग की गई है और हालात को सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक राहत के कोई बड़े संकेत नहीं दिख रहे हैं। कई लोगों को घंटों इंतजार करने के बाद भी पेट्रोल नहीं मिल पा रहा है।
आम लोगों की बढ़ी मुश्किलें
ईंधन संकट का असर सबसे ज्यादा आम जनता और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। किसान, ट्रांसपोर्टर और रोजाना सफर करने वाले लोग परेशान हैं। कई लोगों को जरूरत के काम टालने पड़ रहे हैं, जबकि सार्वजनिक परिवहन पर भी दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल यूपी-नेपाल बॉर्डर के जिलों में लोग पेट्रोल और डीजल के लिए लंबा इंतजार करने को मजबूर हैं।