पंजाब के गुरदासपुर जिले की तीन प्रमुख नगर परिषदों (गुरदासपुर, दीनानगर और कादियां) के चुनाव नतीजे सामने आ चुके हैं, जिन्होंने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। इन चुनावों में कहीं एकतरफा जीत का जश्न देखने को मिला, तो कहीं मुकाबला बेहद करीबी और दिलचस्प मोड़ पर आकर टिक गया है। कुल 235 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने के लिए प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई थी, जिसके तहत 109 पोलिंग बूथों पर करीब 2500 पुलिसकर्मियों की तैनाती में शांतिपूर्ण ढंग से मतदान प्रक्रिया को संपन्न कराया गया।
गुरदासपुर में कांग्रेस की बंपर जीत
नगर परिषद गुरदासपुर के नतीजों ने कांग्रेस खेमे में भारी उत्साह भर दिया है। यहां की कुल 29 सीटों में से कांग्रेस ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 21 वार्डों पर शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को केवल 7 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा, गुरदासपुर के वार्ड नंबर 4 से एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी बाजी मारकर सबको चौंका दिया है। इस बड़ी जीत के साथ ही गुरदासपुर नगर परिषद पर कांग्रेस का कब्जा तय हो गया है।
दीनानगर में ईवीएम खराब, मुकाबला बराबरी पर
नगर परिषद दीनानगर की सियासी तस्वीर बेहद रोमांचक हो गई है। यहाँ कुल 15 वार्ड हैं, लेकिन फिलहाल 14 सीटों के ही परिणाम घोषित किए जा सके हैं। अब तक आए नतीजों में कांग्रेस ने 7 और आम आदमी पार्टी ने 6 सीटें जीतकर मुकाबले को बेहद करीबी बना दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के खाते में केवल 1 सीट आई है। इस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल का खाता तक नहीं खुल सका। दिलचस्प बात यह है कि वार्ड नंबर 6 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में आई तकनीकी खराबी के कारण नतीजा रोक दिया गया है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में इस वार्ड में दोबारा वोटिंग कराई जा सकती है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
कादियां में अकाली दल सबसे आगे
नगर परिषद कादियां की बात करें तो यहाँ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सबसे बड़े दल के रूप में उभरा है। कादियां की कुल 15 सीटों में से अकाली दल ने 6 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि कांग्रेस को 4 सीटें मिली हैं। इसके साथ ही सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 2-2 सीटें गई हैं, जबकि भाजपा को यहाँ भी सिर्फ 1 सीट से ही सब्र करना पड़ा।
वार्ड नंबर 6 की अनोखी परंपरा
कादियां नगर परिषद का वार्ड नंबर 6 पूरे पंजाब में अपनी अनूठी कूटनीति और परंपरा के लिए जाना जाता है। अहमदिया जमात के प्रभाव वाले इस वार्ड में कभी पारंपरिक चुनाव नहीं होते, बल्कि समुदाय खुद आपसी सहमति से अपना नुमाइंदा चुनता है। पूर्व पार्षद अब्दुल वासे के मुताबिक, इस बार यह सीट महिला के लिए आरक्षित है, इसलिए जमात की तरफ से किसी महिला प्रतिनिधि को ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सबसे खास बात यह है कि यह समुदाय सभी वार्डों के नतीजे आने के बाद शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए सबसे ज्यादा बहुमत वाली पार्टी को अपना समर्थन देता है, जिससे कादियां में बोर्ड बनाने की हलचल और तेज हो गई है।