नेपाल की राजधानी काठमांडू इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक तनाव के दौर से गुजर रही है। शहर की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। यह विरोध अब केवल झुग्गी हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकार की नीतियों और प्रशासनिक रवैये के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
झुग्गियां हटाने की कार्रवाई बनी विरोध की वजह
विवाद की शुरुआत काठमांडू महानगर क्षेत्र में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान से हुई। प्रशासन ने नदी किनारे और सार्वजनिक भूमि पर बनी झुग्गियों को हटाना शुरू किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने हजारों गरीब, भूमिहीन और झुग्गीवासियों को बिना किसी स्थायी पुनर्वास योजना के बेघर कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जिन्हें अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में भेजा गया है, वहां रहने की बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
बाढ़ के बाद और भड़का गुस्सा
तनाव उस समय और बढ़ गया जब शुक्रवार को काठमांडू के एक अस्थायी पुनर्वास केंद्र में बाढ़ आ गई। इस दौरान वहां रह रहे करीब 150 लोग फंस गए। अगले दिन जब युवा सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र वहां हालात का जायजा लेने पहुंचे तो पुलिस द्वारा उन्हें रोकने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें एक युवा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद राजधानी में विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए।
गिरफ्तारियों से बढ़ा विवाद
इसी महीने काठमांडू में 25 वर्षीय प्रदर्शनकारी गणेश नेपाली ने खुद को आग लगा ली। बताया गया कि पुलिस द्वारा उसकी मोटरसाइकिल पर व्हील लॉक लगाए जाने के बाद उसने यह कदम उठाया। इस घटना ने पूरे नेपाल में बहस छेड़ दी। वहीं सरकार विरोधी आंदोलन में शामिल कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों की गिरफ्तारी ने भी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। राजधानी से लगभग 206 किलोमीटर दूर कोशी प्रांत में प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाने पर 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गगन कुमार थापा ने इन गिरफ्तारियों की आलोचना करते हुए सरकार से संयम बरतने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच जल्द बताचीत नहीं हुई, तो राजधानी में जारी विरोध और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और हालात पर नजर रखने का दावा कर रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी पुनर्वास, मुआवजे और कार्रवाई की समीक्षा की मांग पर अड़े हुए हैं।
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