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भारतीय हवाई अड्डों ने छुआ सस्टेनेबिलिटी का नया मुकाम, 100% रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने वाले एयरपोर्ट्स की संख्या हुई 104

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने X पर घोषणा की कि भारत भर के 104 हवाई अड्डे अब 100% रिन्यूएबल एनर्जी से चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह जानकारी देते हुए, किंजरापु ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की सस्टेनेबिलिटी पहलों को दिया।

इस उपलब्धि का मतलब है कि ये 104 हवाई अड्डे अब अपनी बिजली की ज़रूरतें पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों से पूरी करते हैं। इसमें ऑन-साइट सोलर पावर प्लांट से बनी बिजली और लंबे समय के समझौतों से ली गई रिन्यूएबल बिजली शामिल है।

200,000 टन इनडायरेक्ट कार्बन उत्सर्जन कम

पिछले कुछ वर्षों में भारत के एविएशन सेक्टर ने क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल लगातार बढ़ाया है। जून 2022 में, दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा हवाई अड्डा बना, जिसने सोलर और हाइड्रोपावर के कॉम्बिनेशन से अपनी बिजली की सभी ज़रूरतें पूरी कीं। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के अनुसार, हवाई अड्डे की लगभग 6% बिजली ऑन-साइट सोलर पावर प्लांट से आती है, जबकि बाकी 94% बिजली लंबे समय के पावर परचेज़ एग्रीमेंट के तहत हाइड्रोपावर से ली जाती है। DIAL का अनुमान है कि इस बदलाव से हर साल लगभग 200,000 टन इनडायरेक्ट कार्बन उत्सर्जन कम होता है।

कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट 2015 में अपना सोलर पावर प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद दुनिया का पहला पूरी तरह से सोलर-पावर्ड हवाई अड्डा बना। तब से हवाई अड्डे ने अपनी सोलर क्षमता बढ़ाई है और पर्यावरण से जुड़ी पहलों के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है।

जून 2026 में, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि 88 से ज़्यादा हवाई अड्डे पहले से ही 100% ग्रीन एनर्जी पर चल रहे थे, और लक्ष्य 2030 तक सभी भारतीय हवाई अड्डों को ‘नेट ज़ीरो’ बनाना है।

हवाई अड्डों ने कई सस्टेनेबिलिटी उपाय अपनाए-

  • रूफटॉप और ज़मीन पर सोलर पावर प्लांट लगाना।

  • पावर परचेज़ एग्रीमेंट के ज़रिए रिन्यूएबल बिजली खरीदना।

  • एनर्जी-एफ़िशिएंट लाइटिंग और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर।

  • कार्बन उत्सर्जन कम करने की पहल।

हवाई अड्डे टर्मिनल ऑपरेशन, एयरफ़ील्ड लाइटिंग, बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, एयर कंडीशनिंग, सिक्योरिटी सिस्टम और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ी मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करते हैं। रिन्यूएबल बिजली का इस्तेमाल करने से ऑपरेशनल कार्बन उत्सर्जन और फॉसिल फ्यूल पर आधारित बिजली पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।

हालांकि, यह घोषणा केवल हवाई अड्डे के ऑपरेशन पर लागू होती है और इसका मतलब यह नहीं है कि विमान खुद रिन्यूएबल एनर्जी से चलते हैं। कमर्शियल उड़ानें अभी भी मुख्य रूप से एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर निर्भर हैं, हालाँकि एविएशन इंडस्ट्री सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और कम कार्बन वाली दूसरी तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर काम कर रही है।

 

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