राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8(Class 8 textbook) की सोशल साइंस की किताब का एक बदला हुआ जारी कर दिया है। पहले न्यायपालिका से जुड़ी कुछ टिप्पणियों को लेकर विवाद होने के बाद यह किताब वापस ले ली गई थी। अब नए संस्करण में न सिर्फ उन अंशों को हटाया गया है बल्कि इतिहास से जुड़े कई अध्यायों में भी बदलाव किए गए हैं।
नई किताब में 1947 के भारत विभाजन को लेकर कांग्रेस के रुख को नए तरीके से दिखाया गया है। संशोधित पाठ में कहा गया है कि कांग्रेस ने विभाजन का व्यापक विरोध किया था और इसे स्वीकार करना उस समय सिर्फ एक विकल्प था या नहीं इस पर आज भी अलग-अलग मत मौजूद हैं। वहीं, पहले मौजूद वह विवरण हटा दिया गया है जिसमें विभाजन के दौरान कांग्रेस नेतृत्व को पूरी तरह असहाय बताया गया था।
नेताजी के अध्याय से हटाए गए कुछ पार्ट
आज़ाद हिंद फौज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े हिस्से में भी बदलाव किए गए हैं। अब किताब में सिर्फ इस बात का जिक्र किया गया है कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए उस समय की ब्रिटिश विरोधी शक्तियों से मदद मांगी थी। आपको बता दें कि पहले संस्करण में मौजूद हिटलर और नाजी विचारधारा से जुड़े हिस्से अब शामिल नहीं हैं।
वीर सावरकर के योगदान का जिक्र
बदले गए नए पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न विचारों और नेताओं को शामिल करते हुए वीर विनायक दामोदर सावरकर के इतिहास को भी जोड़ा गया है। इसके साथ ही किताब में यह बताया गया है कि उन्होंने भी स्वराज की अवधारणा को मुख्य रूप से आगे बढ़ाया था जिससे छात्रों को स्वतंत्रता आंदोलन के विविध दृष्टिकोणों की जानकारी मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद संशोधन
इस साल न्यायपालिका से संबंधित अध्याय की कुछ टिप्पणियों पर विवाद के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अदालत के निर्देश के बाद किताब की छपाई और डिजिटल वितरण पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद समिति ने न्यायपालिका वाले अध्याय को पूरी तरह संशोधित किया। नए संस्करण में जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान जैसी महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। साथ ही, संशोधित पुस्तक तैयार करने वाली समिति में भी कुछ बदलाव किए गए हैं।