Madhya Pradesh IPS Transfer: मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल करते हुए 62 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस सूची में 19 जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP) शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारियां बदलते हुए उन्हें अलग-अलग पदों पर तैनात किया गया है। यह बदलाव कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया माना जा रहा है।
सिंगरौली और सिवनी मामलों का असर
इस फेरबदल में कुछ तबादले हालिया विवादों से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। सिंगरौली के एसपी मनीष खत्री को हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) बनाया गया है। जिले में हाल ही में एक बैंक में दिन-दहाड़े 15 करोड़ रुपये की लूट की घटना सामने आई थी। वहीं सिवनी के एसपी सुनील मेहता को इंदौर में डीसीपी नियुक्त किया गया है, जहां पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता वाले हवाला रैकेट की जांच चल रही है।
19 जिलों के SP बदले
आदेश के मुताबिक भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, नीमच, पांढुर्ना, सिंगरौली, दमोह और सिवनी समेत कुल 19 जिलों के एसपी बदले गए हैं। इन तबादलों के जरिए कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिससे प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
पदोन्नति के बाद नई तैनाती
इस फेरबदल में उन आईपीएस अधिकारियों को भी नई भूमिका दी गई है, जिन्हें हाल ही में डीआईजी रैंक पर पदोन्नति मिली थी, लेकिन वे अब तक एसपी के पद पर कार्यरत थे। सरकार ने ऐसे अधिकारियों को उनके नए पद के अनुरूप जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारी
रीवा के एसपी शैलेंद्र चौहान को भोपाल में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बनाया गया है। धार के एसपी मयंक अवस्थी को इंदौर में पुलिस उप महानिरीक्षक (नारकोटिक्स) नियुक्त किया गया है, जबकि झाबुआ के एसपी शिवदयाल को पुलिस मुख्यालय भोपाल में डीआईजी बनाया गया है। इसके अलावा, रियाज इकबाल, राहुल कुमार लोढ़ा और सिमाला प्रसाद को भी पुलिस मुख्यालय में डीआईजी के पद पर तैनाती दी गई है।
रेंज स्तर पर भी बदलाव
भिंड के एसपी असित यादव को ग्वालियर रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है। वहीं भोपाल के डीसीपी (जोन-2) विवेक सिंह को शहडोल रेंज का डीआईजी बनाया गया है। इन नियुक्तियों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
कानून-व्यवस्था सुधार की कोशिश
सरकार के इस बड़े फैसले को कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालिया घटनाओं के मद्देनजर यह फेरबदल प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही बढ़ाने के संकेत भी देता है।
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