HomeBreaking NewsTMC बागियों का नया सियासी ठिकाना बनी NCPI पार्टी, जानिए क्या है...

TMC बागियों का नया सियासी ठिकाना बनी NCPI पार्टी, जानिए क्या है इसका इतिहास…

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा बदलाव देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का ऐलान कर दिया। इन बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को औपचारिक पत्र सौंपकर अपने विलय की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने सदन में अलग सीटिंग अरेंजमेंट की भी मांग की।

बागी गुट की ओर से नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष ने कहा कि वे अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर काम करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का समर्थन करेंगे। इस समूह के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने का दावा भी किया जा रहा है जिससे यह राजनीतिक बदलाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

कब हुआ NCPI पार्टी का गठन ?

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, जिसका गठन 20 जनवरी 2023 को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले हुआ था। यह पार्टी चुनाव आयोग में एक रजिस्टर्ड राजनीतिक दल के रूप में दर्ज है हालांकि इसे राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता नहीं मिली है।

पार्टी का चुनाव चिन्ह “पेन निब” (कलम की नोक) है, जो इसकी पहचान बनाता है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी को शुरुआती दौर में लगभग 1.13 लाख रुपये का ही चंदा प्राप्त हुआ था जिससे इसके सीमित संसाधनों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल में है पंजीकृत कार्यालय

NCPI से जुड़े दस्तावेजों में शेली कुंडू का नाम राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख भूमिका में दर्ज है। वह पार्टी से जुड़े वित्तीय और संगठनात्मक रिकॉर्ड में कोषाध्यक्ष के रूप में भी सूचीबद्ध हैं। उनके पति उत्तिया कुंडू का नाम भी पार्टी के पंजीकृत पते से जुड़ी गतिविधियों में सामने आता है।
पार्टी का पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में बताया जाता है। इसके अलावा, पार्टी से जुड़े कुछ सामाजिक संगठनों और कंपनियों के नाम भी रिकॉर्ड में दर्ज हैं जो इसके नेटवर्क को दर्शाते हैं।

त्रिपुरा से की चुनावी शुरुआत

दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल में पंजीकृत होने के बावजूद NCPI ने अपनी राजनीतिक शुरुआत त्रिपुरा से की। वहां पार्टी की गतिविधियों का संचालन शांतनु डे के नेतृत्व में हुआ। पार्टी ने आदिवासी और वंचित समुदायों के प्रतिनिधित्व के उद्देश्य से त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की।

नई राजनीतिक ताकत 

20 सांसदों के जुड़ने के बाद NCPI अब अचानक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। जहां पहले यह एक छोटे और सीमित प्रभाव वाली पार्टी मानी जाती थी वहीं अब इसके राजनीतिक विस्तार और भविष्य की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में महिलाओं की मेहनत से चमका बाजरा मिशन, केदारनाथ का…

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments