मिडिल ईस्ट संकट के बीच एक अहम खबर सामने आई कि अमेरिका(America) और ईरान(Iran) के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए इस्लामाबाद में 21 अप्रैल की तारीख को दूसरे दौर की शांति वार्ता होने वाली है। लेकिन इसी बीच अचानक एक और खबर आई है कि ईरान ने इस दूसरी वार्ता के लिए अमेरिका के सामने एक अहम शर्त रख दी है और ईरान का कहना है कि वो अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए अपना कोई प्रतिनिधिमंडल भेजने वाला नहीं है।
अमेरिका संग वार्ता को लेकर क्या बोला ईरान ?
एक ईरानी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान की ओर पाकिस्तान में अमेरिका के साथ दूसरी वार्ता करने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसको लेकर ईरान का कहना है कि जब तक स्ट्रेट और होर्मुज से अमेरिकी नौसेनिकों की नाकेबंदी नहीं हटेगी तब तक ईरान अपना कोई भी दल बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं भेजेगा।
समझौता न होने पर क्या करेंगे ट्रंप ?
एक तो पहले ही मिडिल ईस्ट संकट को लेकर हर तरफ तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है वहीं, स्थिति और बिगड़ती हुई नजर आ रही है। 21 अप्रैल को अमेरिका ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजकर ईरान प्रतिनिधिमंडल के साथ दूसरी शांति वार्ता करने की योजना बनाई थी लेकिन अब ईरान ने दूसरी वार्ता के लिए इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका की नाकेबंदी रहेगी ईरान अपने प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान नहीं भेजेगा।
वहीं, अब एक बड़ा सवाल ये खड़ा हुआ है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीत शांति वार्ता नहीं हुई और इन दोनों ही देशों के बीच समझौते की स्थिति बन पानी मुश्किल हुई तो इस स्थिति में डॉनल्ड ट्रंप का क्या एक्शन होगा? इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के ट्रे यिंगस्ट को दिए एक मीडिया इंटरव्यु में कहा कि, अगर समझौता नहीं हुआ, तो वो समझौता जो हमने किया था, उनके सभी पुल और पावर प्लांट को मैं तबाह कर दूंगा। अगर वो समझौते पर साइन नहीं करते हैं तो पूरा देश ही तबाह हो जाएगा।