वेनेजुएला पर अटैक के बाद बिगड़े हालात, निशाने पर ग्रीनलैंड-ईरान, फॉरेन एक्सपर्ट ने समझाया अमेरिका का ग्लोबल गेम

विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने अमेरिका की रणनीति, ईरान की कमजोर होती स्थिति और भारत की संतुलित नीति पर विस्तार से जानकारी दी।

Jan 15, 2026 - 16:47
Jan 15, 2026 - 16:47
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वेनेजुएला पर अटैक के बाद बिगड़े हालात, निशाने पर ग्रीनलैंड-ईरान, फॉरेन एक्सपर्ट ने समझाया अमेरिका का ग्लोबल गेम
Exclusive Interview of Foreign Expert Robinder Sachdev

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य कार्रवाई के संकेत, इज़रायल की परमाणु आशंकाएं और तेल की वैश्विक राजनीति ने मिडिल ईस्ट से लेकर लैटिन अमेरिका तक हलचल बढ़ा दी है। इन जटिल हालातों पर विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने अमेरिका की रणनीति, ईरान की कमजोर होती स्थिति और भारत की संतुलित नीति पर विस्तार से जानकारी दी।

सबसे कमजोर दौर में ईरान

रोबिंदर सचदेव ने बताया कि, ईरान पिछले 40 वर्षों की सबसे कमजोर स्थिति से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने देश के अंदर हालात बिगाड़ दिए हैं। अमेरिका और इज़रायल चाहते हैं कि ईरान की मौजूदा सत्ता कमजोर पड़े या अंदरूनी दबाव के चलते तख्तापलट हो जाए। ट्रंप की नीति साफ है-“मेरे अधीन हो जाओ।” हालांकि अमेरिका अंदरूनी हालात के जरिए सत्ता परिवर्तन चाहता है, wahin सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है।

वेनेजुएला और ग्रीनलैंड पर अमेरिका की नजर

सचदेव का कहना है कि अमेरिका की वैश्विक रणनीति का केंद्र तेल और रणनीतिक नियंत्रण है। वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिस पर अमेरिका की सीधी नजर है। वहां वह ऐसी सरकार चाहता है जो पूरी तरह वॉशिंगटन के इशारों पर चले, यही वजह है कि वेनेजुएला को एक तरह से कॉलोनी बनाने की कोशिश हो रही है। इसके अलावा ग्रीनलैंड भी अमेरिका के लिए अहम है, क्योंकि वहां पर नियंत्रण वैश्विक ताकत का संतुलन बदल सकता है। सचदेव के शब्दों में, “अमेरिका खुद को सोलर सिस्टम का सन मानता है।”

क्या है भारत की नीति

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में बेहद संतुलित रुख अपनाया है। ईरान से अच्छे रिश्तों के बावजूद प्रतिबंधों के चलते भारत ने वहां से तेल आयात बंद रखा है और रूस से तेल खरीद भी घटाई है। 25 प्रतिशत टैरिफ के अमेरिकी ऐलान का सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ रहा है, लेकिन भारत हर कदम सोच-समझकर उठा रहा है।

वहीं मिडिल ईस्ट के देश अमेरिका के साथ तो खड़े रहेंगे, लेकिन खुलकर समर्थन देने से बचेंगे। रोबिंदर सचदेव के मुताबिक आने वाले समय में यह टकराव सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

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