EPF New Scheme: देशभर में कर्मचारियों के लिए एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड (EPF) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने इस सप्ताह ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ के तहत नई EPF स्कीम 2026 लागू कर दी है, जिसने 74 साल पुरानी EPF स्कीम 1952 की जगह ले ली है। नई व्यवस्था का उद्देश्य पीएफ नियमों को सरल बनाना, करीब आठ करोड़ सब्सक्राइबर्स को बेहतर डिजिटल सुविधाएं देना, कागजी काम कम करना और फंड के उपयोग को ज्यादा सुविधाजनक बनाना है।
PF कटौती के नियम में क्या बदला?
नई स्कीम के तहत 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पर 12% यानी अधिकतम 1,800 रुपये प्रति माह का जरुरी पीएफ योगदान पहले की तरह जारी रहेगा। हालांकि, यदि किसी कर्मचारी का वेतन इससे अधिक है, तो 1,800 रुपये से ज्यादा पीएफ कटवाना उसकी सहमति पर निर्भर करेगा। उदहारण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की महीने में सैलरी 1 लाख रुपये है, तो कंपनी उसकी अनुमति के बिना 1,800 रुपये से अधिक पीएफ नहीं काट सकती।
Partial Withdrawal के नियम हुए आसान
नई EPF स्कीम में partial withdrawal के नियमों को भी आसान बनाया गया है। पहले मौजूद 13 कैटेगरी को घटाकर अब केवल तीन कैटेगरी कर दी गई हैं। इनमें जरुरी जरूरतें जैसे बच्चों की पढ़ाई, शादी और बीमारी, घर से जुडी जरूरतें और खास परिस्थितियां शामिल हैं। साथ ही आंशिक निकासी (partial withdrawal) के लिए खाते में कम से कम 25% पैसा बनाए रखना जरुरी होगा। यानी सदस्य अपनी कुल जमा राशि का 50% से 75% तक निकाल सकेंगे।
नौकरी छोड़ने और क्लेम से जुड़े नए प्रावधान
नई व्यवस्था के तहत नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को पूरा पीएफ निकालने के लिए न्यूनतम सदस्यता अवधि की शर्त का पालन नहीं करना होगा। इसके अलावा यदि EPFO बिना किसी ठोस कारण के क्लेम या सेटलमेंट में देरी करता है, तो संबंधित सदस्य को 12% की दर से ब्याज भी मिलेगा।
आधार, PAN और बैंक अपडेट होगा जरूरी
नई स्कीम में डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए सदस्यों को अपना आधार, PAN और आधार से जुड़े बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इससे आंशिक निकासी (partial withdrawal) सहित दूसरी सेवाओं के ऑनलाइन क्लेम की प्रक्रिया आसान होगी। वहीं, स्कीम लागू होने के 15 दिनों के भीतर नियोक्ता को फॉर्म-5 में कर्मचारियों के आधार, PAN, UAN और ग्रॉस वेज से जुड़ी सभी जानकारियां अपडेट करनी होंगी।
क्या पहले जैसा ही रहेगा?
नई स्कीम लागू होने के बावजूद जरुरी EPF योगदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से मूल वेतन का 12% योगदान पहले की तरह जारी रहेगा, जबकि अधिसूचित संस्थानों के लिए 10% योगदान की मौजूदा व्यवस्था लागू रहेगी। मौजूदा EPF सदस्य बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के खुद ही EPF स्कीम 2026 के सदस्य बन जाएंगे और उन्हें नया खाता खुलवाने की जरूरत नहीं होगी।
EDLI और EPS के लाभों पर नहीं पड़ेगा असर
नई स्कीम का असर ‘एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस’ (EDLI) स्कीम के तहत मिलने वाले लाभों पर नहीं पड़ेगा। किसी सदस्य की मौत होने पर नॉमिनी या कानूनी वारिसों को पहले की तरह न्यूनतम 50,000 रुपये और अधिकतम 7 लाख रुपये का बीमा भुगतान मिलता रहेगा। वहीं, एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम 1995 (EPS 95) के मौजूदा सदस्य खुद ही EPS 2026 के सदस्य बन जाएंगे और उनकी पेंशन भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
Read More:
पूर्व CM चन्नी के घर जुटे कांग्रेस के दिग्गज! कौन-कौन बैठक में पहुंचा? पूरी लिस्ट आई सामने

