Delhi High Court on CM Rekha Gupta Attack Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमले के मामले में आरोपियों को बड़ा झटका देते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे ट्रायल को रोका जा सके।
क्या है पूरा मामला
यह मामला पिछले साल अगस्त का है, जब सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जन सुनवाई के दौरान रेखा गुप्ता पर हमला किया गया था। इस मामले में गुजरात के राजकोट निवासी राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा रफीउल्लाह शेख को आरोपी बनाया गया है।
याचिका पर सुनवाई और कोर्ट की टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस अनूप जयराम बम्बानी ने आरोपियों की याचिका पर सुनवाई की। आरोपियों ने अपने खिलाफ तय किए गए आरोपों को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान जज ने स्पष्ट कहा कि जब तक यह साबित न हो कि प्रक्रिया में कुछ गलत हो रहा है या होने वाला है, तब तक वह किसी भी कार्रवाई को रोकने में विश्वास नहीं रखते।
मोबाइल फॉरेंसिक जांच के निर्देश
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच जल्द कराने की मांग की। इस पर कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि मोबाइल फोन इस मामले के कई अहम पहलुओं को उजागर कर सकते हैं, खासकर तब जब दोनों आरोपी दिल्ली के निवासी नहीं हैं। अदालत ने फॉरेंसिक साइंस लैब को चार हफ्तों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
बचाव पक्ष की दलील खारिज
आरोपियों के वकील ने दलील दी कि यदि ट्रायल पर रोक नहीं लगाई गई, तो 25 अप्रैल से गवाहों के बयान दर्ज होने शुरू हो जाएंगे, जिससे उनके मुवक्किल को नुकसान हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। जज ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “जब तक यह साफ न हो कि कुछ गलत हो रहा है या होने वाला है। मैं किसी प्रक्रिया को रोकने में विश्वास नहीं रखता। मुझे ऐसा कुछ नहीं दिख रहा और मुझे अब तक समझ नहीं आया कि आप दिल्ली आए ही क्यों थे।”
आरोपियों के खिलाफ दर्ज है एफआईआर
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 20 अगस्त को एफआईआर दर्ज की थी। दोनों आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। दिसंबर में कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप भी तय कर दिए थे। अब इस मामले में अगली सुनवाई 25 अप्रैल से शुरू होगी, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके साथ ही मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और साक्ष्यों के आधार पर अगली कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
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