पंजाब विधानसभा(Punjab Assembly) के विशेष सत्र में शुक्रवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विश्वासमत प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने पारित कर दिया गया है। हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान विपक्ष के ज्यादातर विधायक मौजूद नहीं थे जिससे राजनीतिक माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। प्रस्ताव पेश करते समय मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दिनों तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं और नकारात्मक खबरों को जानबूझकर हवा दी जा रही है।
जनता को किया जा रहा भ्रमित
उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी के विधायकों में टूट की बातें पूरी तरह निराधार हैं और जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। सत्र के दौरान उस वक्त स्थिति गरमा गई जब मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों पर सदन में मोबाइल इस्तेमाल करने को लेकर टिप्पणी की। इसके बाद कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के बैठने के अंदाज पर भी आपत्ति जताई गई जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
कब बढ़ा विवाद ?
विवाद उस समय और बढ़ गया जब खैरा ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए। हालात बिगड़ते देख कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के विधायक भी सत्र में शामिल नहीं हुए।
इस दौरान मंत्री संजीव अरोड़ा ने सरकार की चार साल की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे काम किए हैं जो पहले लंबे समय तक नहीं हो सके। उन्होंने सस्ती बिजली, भ्रष्टाचार पर रोक और लंबित कार्यों के समाधान को प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया।
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