मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने के बाद सरकार और तेल कंपनियों ने एलपीजी वितरण व्यवस्था(LPG Rules Change) में कई बदलाव किए हैं ताकि घबराहट की स्थिति न बने और आपूर्ति सुचारु बनी रहे। इसी कड़ी में 1 मई से एलपीजी सिलेंडर से जुड़े कुछ नए नियम लागू कर दिए गए हैं। सरकार ने एलपीजी और पीएनजी दोनों का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की पहचान शुरू कर दी है ताकि सब्सिडी का दुरुपयोग रोका जा सके।
14 मार्च को जारी निर्देशों के मुताबिक, जिन घरों में पाइपलाइन के जरिए पीएनजी मिल रही है उन्हें अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। ऐसे उपभोक्ता अब न तो नया एलपीजी कनेक्शन ले सकेंगे और न ही रिफिल के लिए पात्र होंगे। तेल कंपनियों को भी ऐसे ग्राहकों को सिलेंडर न देने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक 43 हजार से ज्यादा लोगों ने अपना एलपीजी कनेक्शन वापस कर दिया है।
बुकिंग और डिलीवरी के नए नियम लागू
इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के ग्राहकों के लिए बुकिंग और डिलीवरी प्रक्रिया को और सख्त किया गया है। अब सिलेंडर डिलीवरी के लिए OTP अनिवार्य होगा साथ ही KYC अपडेट कराना भी जरूरी है। बुकिंग के बीच का अंतराल भी बढ़ा दिया गया है शहरी इलाकों में यह 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन तक कर दी गई है।
कमर्शियल सिलेंडर महंगे
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में मार्च 2026 से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मार्च और अप्रैल में कई बार दाम बढ़ने के बाद 1 मई को फिर संशोधन किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार कीमतों में करीब 993 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है जिससे व्यापारिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
कीमतें बढ़ने की क्या है वजह ?
गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इस स्थिति के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग प्रभावित हुआ है, जो भारत के लिए तेल और गैस आयात का अहम रास्ता रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू एलपीजी, पाइपलाइन गैस और सीएनजी की आपूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित की जा रही है और हालात पर नजर रखी जा रही है।