महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में चल रही चर्चा के दौरान गंभीर बहस के बीच हंसी-मजाक का माहौल भी देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की ओर इशारा करते हुए कहा कि अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, कभी-कभी मदद कर देते हैं। इस टिप्पणी पर अखिलेश यादव मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ते नजर आए।
धर्मेंद्र यादव पर भी बोले पीएम
बहस के दौरान पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र यादव ने उनकी पहचान स्पष्ट कर दी कि वे अति पिछड़े वर्ग से आते हैं। प्रधानमंत्री ने संविधान को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि इसी संविधान की वजह से उन्हें देश का नेतृत्व करने का अवसर मिला है।
बिल पर जताया विरोध
चर्चा के दौरान धर्मेंद्र यादव ने तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए उन्हें संविधान की भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि संसद को संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन इन विधेयकों के जरिए संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव की कोशिश की जा रही है। महिला आरक्षण बिल को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए बड़े बदलाव लाने की तैयारी है, जिसका व्यापक असर देश पर पड़ सकता है।
कश्मीर और असम का जिक्र
धर्मेंद्र यादव ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए कश्मीर और असम का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि केंद्र सरकार पहले भी संवैधानिक बदलाव कर चुकी है और यह बिल उसी दिशा में एक और कदम हो सकता है।
महिलाओं की भूमिका पर जोर
महिला आरक्षण बिल के समर्थन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की महिलाएं कभी पीछे नहीं रहीं और उन्होंने हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों ने देश के विकास में अहम भूमिका निभाई है और बेटियां देश का नाम रोशन कर रही हैं।
महिलाओं पर भरोसा करने की अपील
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं पर भरोसा करना चाहिए और उन्हें निर्णय लेने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इसमें राजनीति देख रहे हैं, उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए क्योंकि इस बदलाव से सभी को फायदा होगा।
बहस के बीच राजनीति और संदेश दोनों
कुल मिलाकर महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में जहां एक ओर तीखी बहस देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर हल्के-फुल्के पल भी सामने आए। यह चर्चा न सिर्फ राजनीतिक मतभेदों को उजागर करती है, बल्कि महिलाओं की भूमिका और अधिकारों पर भी व्यापक संवाद को आगे बढ़ाती है।
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