सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ी गतिविधियों की जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने की।
‘इतनी भावुकता से न लें मामला’
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने अदालत में कहा कि चीफ जस्टिस द्वारा पहले ही स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद गलत तथ्यों को जानबूझकर फैलाया जा रहा है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “इस मामले को इतनी भावुकता से न लें।” एक अन्य वकील ने फर्जी कानून की डिग्रियों के मामलों की CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि अदालत की कार्यवाही और जजों की टिप्पणियों का व्यावसायिक और प्रचारात्मक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। हम इस पर देखेंगे।”
याचिका में क्या मांग की गई?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग अदालत की मौखिक टिप्पणियों और कार्यवाही का इस्तेमाल प्रचार अभियानों के लिए कर रहे हैं। साथ ही फर्जी डिग्रियों के जरिए वकालत करने वाले फर्जी वकीलों की जांच की मांग भी की गई है।
‘कॉकरोच’ टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद
दरअसल, 15 मई को वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया और सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद 16 मई को चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणी युवाओं के खिलाफ नहीं थी, बल्कि उन लोगों के खिलाफ थी जो फर्जी डिग्रियों के जरिए विधि पेशे में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
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