AI Scam Alert: देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्कैम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी को देखते हुए भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने कहा है कि एआई की मदद से साइबर अपराध पहले से कहीं ज्यादा तेज और खतरनाक हो गए हैं।
साइबर अटैक हो रहे हैं ज्यादा एडवांस
CERT-In के अनुसार, अब हैकर्स और साइबर अपराधी एआई की मदद से सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को बहुत तेजी से पहचान सकते हैं। इससे API, क्लाउड सर्विस और एंटरप्राइज सिस्टम में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर क्रेडेंशियल चोरी किए जा रहे हैं और सिस्टम को निशाना बनाया जा रहा है।
फिशिंग और नकली पहचान से बढ़ा खतरा
एजेंसी ने बताया कि AI की वजह से फिशिंग स्कैम और पहचान की नकल (इम्पर्सोनेशन) जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं। अपराधी अब ईमेल, मैसेज, वॉइस कॉल और वीडियो कॉल के जरिए अलग-अलग भाषाओं में लोगों को धोखा दे रहे हैं, जिससे लोग आसानी से जाल में फंस रहे हैं।
कम स्किल वाले हैकर्स भी बन रहे खतरा
वॉर्निंग में कहा गया है कि अब साइबर क्राइम करने के लिए हाई स्किल की जरूरत नहीं रह गई है। AI टूल्स की मदद से कम अनुभव वाले अपराधी भी बड़े स्तर पर अटैक कर सकते हैं, जिससे डेटा ब्रीच, अनऑथराइज्ड एक्सेस और फाइनेंशियल फ्रॉड का खतरा बढ़ गया है।
बिजनेस सेक्टर के लिए सख्त सलाह
CERT-In ने कंपनियों और ऑर्गेनाइजेशन को अपने सिस्टम की लगातार मॉनिटरिंग करने की सलाह दी है। साथ ही अनावश्यक सर्विस, पोर्ट और प्रोटोकॉल को बंद रखने को कहा गया है ताकि साइबर अटैक का खतरा कम हो सके। एजेंसी ने यह भी कहा है कि सिस्टम लॉग्स और नेटवर्क एक्टिविटी पर लगातार नजर रखी जाए।
MSMEs के लिए आसान सुरक्षा उपाय
छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए भी सुरक्षा उपाय सुझाए गए हैं। इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम को ऑटोमेटिक अपडेट पर रखने और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) का उपयोग करने पर जोर दिया गया है, ताकि डेटा सुरक्षा मजबूत की जा सके।
आम यूजर्स के लिए चेतावनी
सरकारी एजेंसी ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। कहा गया है कि मोबाइल और कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें, मजबूत और यूनिक पासवर्ड का इस्तेमाल करें और जहां संभव हो वहां मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर एक्टिव करें। CERT-In की इस चेतावनी से साफ है कि AI तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से साइबर खतरे भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में यूजर्स और कंपनियों दोनों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है ताकि डिजिटल फ्रॉड से बचा जा सके।
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