ITR Filing Alert: वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार ने मार्च के अंत तक सभी जरूरी फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं, जिससे टैक्सपेयर्स समय पर रिटर्न भर सकें।
किसके लिए क्या है डेडलाइन?
वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनर्स और जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई तय की गई है। इस श्रेणी के लोग ITR-1 और ITR-2 फॉर्म का उपयोग करेंगे। वहीं, छोटे कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के लिए ITR-3 और ITR-4 भरने की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। जिन करदाताओं के खातों का ऑडिट आवश्यक है, उनके लिए आखिरी तारीख 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
गलत जानकारी देना पड़ सकता है भारी
ITR भरते समय आय को जानबूझकर कम दिखाना या गलत निवेश और खर्च दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश करना गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में पकड़े जाने पर टैक्स राशि का 200 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
जेल की सजा का भी प्रावधान
आयकर कानून के तहत टैक्स चोरी या जानबूझकर आय छिपाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। आयकर अधिनियम की धारा 276 (1) के तहत दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी करदाता से अनजाने में आय की जानकारी देने में चूक हो जाती है, तो उस पर अपेक्षाकृत कम जुर्माना लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में टैक्स की राशि का लगभग 50 प्रतिशत तक पेनल्टी लग सकती है।
किन गलतियों को माना जाता है अपराध
आयकर विभाग के अनुसार, कई तरह की गड़बड़ियां अपराध की श्रेणी में आती हैं। इसमें विदेश में मौजूद बैंक खाते, संपत्ति या शेयर बाजार से हुए बड़े मुनाफे को छिपाना शामिल है। इसके अलावा फर्जी रेंट रसीद (HRA), नकली डोनेशन (80G) या बिना निवेश के 80C का दावा करना भी गंभीर उल्लंघन है। टैक्स बचाने के लिए अकाउंट बुक, बिल या वाउचर में छेड़छाड़ करना भी कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है और कानूनी परेशानी बढ़ सकती है।
बार-बार गलती करने पर कड़ी कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति बार-बार टैक्स नियमों का उल्लंघन करता है, तो आयकर विभाग उसके खिलाफ ‘प्रॉसिक्यूशन’ की कार्रवाई शुरू कर सकता है। ऐसे मामलों में सजा और जुर्माना दोनों का खतरा बढ़ जाता है।
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