Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार जिले में मौजूद भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज बड़ा फैसला आ सकता है। इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच इस जाने-माने मामले को लेकर अपना फैसला सुनाने वाली है। फैसला आने से पहले धार शहर सहित पूरे मध्य प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर सुनवाई की थी। अदालत ने 12 मई को सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 15 मई को इस मामले में फैसला सुनाए जाने की संभावना है।
विष्णु शंकर जैन ने दी फैसले की जानकारी
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि हाईकोर्ट 15 मई को फैसला सुना सकता है। इसके बाद से ही इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
क्या है भोजशाला-कमाल मौला विवाद
धार स्थित भोजशाला परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र था। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसके अलावा जैन समुदाय के एक वर्ग का कहना है कि यह स्थल मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल रहा है। इसी धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
हिंदू पक्ष ने रखी ये मांग
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि भोजशाला मूल रूप से हिंदू राजा द्वारा बनवाया गया मंदिर है। हिंदू पक्ष ने परिसर में नमाज की अनुमति समाप्त करने और मां सरस्वती की मूर्ति दोबारा स्थापित करने की मांग की थी।
मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से ASI सर्वे रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के वकीलों ने अदालत में कहा कि सर्वे रिपोर्ट में लगातार ‘भोजशाला मंदिर’ शब्द का उपयोग किया गया, जबकि इसे साबित करने वाले ठोस ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि स्थल को मंदिर बताने के पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए गए।
ASI सर्वे पर हुआ तनाव
पूरे मामले में ASI की सर्वे रिपोर्ट सबसे अहम मुद्दा बनी रही। हिंदू पक्ष ने रिपोर्ट को अपने दावे के समर्थन में मजबूत आधार बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। अदालत में दोनों पक्षों के बीच ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक तथ्यों और धार्मिक परंपराओं को लेकर लंबी बहस हुई।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की
फैसले से पहले जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर नजर रख रही हैं ताकि कोई भी घटना न हो।
Read More:
21 जून को फिर होगी NEET की परीक्षा, पेपर लीक के बाद NTA का बड़ा फैसला, जल्द जारी होंगे एडमिट कार्ड

