हरियाणा के रेवाड़ी में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी(CM Nayab Singh Saini) शामिल हुए। इस कार्यक्रम के दौरान किसानों की आय, कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर सरकार की ओर से किसानों और रेवाड़ी क्षेत्र के लिए कई योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी साझा की गई।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में किसानों को खेती से जुड़ी सुविधाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसल तकनीक और उन्नत किस्म के बीजों की जरूरत पर भी बात की। उनके अनुसार, बदलते मौसम और पानी की कमी जैसी चुनौतियों को देखते हुए कृषि क्षेत्र में नई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
‘हरियाणा FPO मिशन 2026’ की शुरुआत
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम में किसान हितैषी योजनाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ का उद्देश्य केवल कृषि भूमि की सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देना भी है।
CM सैनी ने बताया कि किसानों के लिए जारी विभिन्न योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही ‘हरियाणा FPO मिशन 2026’ के जरिए किसानों को संगठित कर बाजार से बेहतर जुड़ाव देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
रेवाड़ी को मिली 121 करोड़ की विकास परियोजनाएं
समारोह के दौरान रेवाड़ी जिले के विकास के लिए करीब 121 करोड़ रुपये की लागत वाली 11 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। इनमें बावल क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। कार्यक्रम में 40 करोड़ रुपये की लागत वाली दो योजनाओं का उद्घाटन किया गया जबकि लगभग 81 करोड़ रुपये की नौ नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई।
अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन कार्यक्रम में कृषि विकास, तकनीकी बदलाव और ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष फोकस रहा।