पड़ोसी देश बांग्लादेश में आगामी सर्दियों के मौसम के दौरान महंगाई का एक नया और गंभीर दौर शुरू होने की आशंका जताई गई है। ‘द डेली स्टार’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और कृषि उत्पादन की लागत बढ़ने के कारण खाद्य पदार्थों के दाम में भारी इजाफा हो सकता है। नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ती जीवनयापन लागत के चलते गरीब और कमजोर परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव आ सकता है। कई परिवार अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए सोना, आभूषण और अन्य संपत्तियां बेचने या कर्ज लेने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
ग्रामीण कर्ज 51 प्रतिशत तक पहुंचा
बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट (BIDS) के महानिदेशक एकेएम इनामुल हक ने चर्चा के दौरान कहा कि नीति निर्माताओं को यह मानकर नहीं बैठना चाहिए कि आर्थिक हालात जल्द सुधर जाएंगे। उन्होंने बताया कि तेल की कीमतें बढ़ने से उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्रियां महंगी हो गई हैं, जिससे खेती की लागत लगभग दोगुनी हो गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज का स्तर बढ़कर 51 प्रतिशत, अन्य शहरी क्षेत्रों में 40 प्रतिशत और महानगरों में 32 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने बाजार निगरानी मजबूत करने और सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली की समीक्षा करने पर जोर दिया।
विकास दर घटकर 3.4 फीसदी पर पहुंची
ढाका विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर सायमा हक बिदिशा ने आर्थिक असमानता पर चिंता जताते हुए अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए भी न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इस बीच, विश्व बैंक के आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था धीमी वृद्धि, बढ़ते व्यापार घाटे और कमजोर बैंकिंग सेक्टर से जूझ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की आर्थिक वृद्धि दर गिरकर मात्र 3.4 प्रतिशत रह गई है, और वित्त वर्ष 2026-27 में भी इसके इसी के आसपास रहने का अनुमान है, जो सरकार के 6.5 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी दूर है।
READ MORE: हरियाणा में ₹555 करोड़ से बनेगी नई फोरलेन सड़क, बिलासपुर से कुलाना का सफर होगा आसान

