भारत संक्रामक रोगों और AMR से जुड़े वैज्ञानिक शोध में एक और कदम आगे बढ़ा रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को तमिलनाडु के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) में ‘सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन बैक्टीरियोफेज एंड इंफेक्शियस डिजीज’ (CARBID) का उद्घाटन किया।
वेलूर स्थित VIT में Centre for Advanced Research in Bacteriophage and Infectious Diseases (CARBID) का उद्घाटन किया।
भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा आज अनुसंधान से समाधान और नवाचार से जनकल्याण की दिशा में नई ऊंचाइयां छू रही है। ICMR के सहयोग से स्थापित यह केंद्र संक्रामक रोगों के… pic.twitter.com/xgqeGotVOa
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) August 22, 2026
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की देखरेख में शुरू किया गया यह सेंटर बैक्टीरियोफेज, दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया और गंभीर संक्रामक रोगों से जुड़े शोध करेगा। यह सेंटर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि प्रयोगशाला में होने वाले वैज्ञानिक शोध का इस्तेमाल असल ज़िंदगी में स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान खोजने के लिए किया जाए।
VIT में CARBID
CARBID को ICMR के ‘सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च’ पहल के तहत शुरू किया गया है। अन्य कामों के अलावा, यह बैक्टीरियोफेज का अध्ययन करेगा और बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज के लिए उनका इस्तेमाल करेगा।
बैक्टीरियोफेज नाम का वायरस बैक्टीरिया को खत्म कर देता है। इस तरह, इलाज में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण कई एंटीबायोटिक्स की असरदार क्षमता कम हो गई है।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर शोध
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक खतरा पैदा करता है क्योंकि एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया का इलाज करना मुश्किल हो जाता है। CARBID में शोध के विषयों में MDR बैक्टीरिया, ESKAPE पैथोजन, बायोफिल्म और बैक्टीरियोफेज व एंटीबायोटिक्स के साथ कंबाइंड थेरेपी शामिल हैं। CARBID का मकसद ऐसा शोध करना है जिससे भविष्य में संक्रमण को रोकने और इलाज के नए तरीके विकसित करने में मदद मिल सके।
प्रयोगशाला शोध से जन स्वास्थ्य तक
CARBID ट्रांसलेशनल रिसर्च भी करेगा, जिसमें वैज्ञानिक शोध के नतीजों को प्रयोगशालाओं से निकालकर स्वास्थ्य सेवा के काम में लाया जाता है। भारत और विदेशों के वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और संस्थानों के बीच सहयोग CARBID की गतिविधियों का हिस्सा होगा। मकसद सिर्फ़ शोध तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि भविष्य में इस्तेमाल की जा सकने वाली विभिन्न तकनीकों और इलाज के तरीकों पर भी विचार करना है।
ICMR के शोध प्रोजेक्ट्स में फेज रिसर्च शामिल
VIT के अनुसार, CARBID को ICMR के कई शोध प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग मिली है। इन प्रोजेक्ट्स में MDR ESKAPE पैथोजन से होने वाले गंभीर श्वसन संक्रमण के इलाज के लिए फेज कॉकटेल विकसित करना शामिल है।
ICMR समर्थित एक और CAR प्रोजेक्ट का मकसद त्वचा और मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (मांसपेशियों और हड्डियों के तंत्र) के बैक्टीरियल संक्रमण के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बैक्टीरियोफेज विकसित करना है। VIT के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की अवधि 2024-2029 है और इसकी कुल लागत लगभग ₹9.84 करोड़ है, जिसमें से ₹4.82 करोड़ VIT को दिए गए हैं।
CARBID क्यों ज़रूरी है?
यह सेंटर दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (रोगाणुरोधी प्रतिरोध) के बढ़ते खतरे को देखते हुए बनाया गया है। बैक्टीरियोफेज पर की जाने वाली स्टडी को एंटीबायोटिक थेरेपी का विकल्प या पूरक माना जा सकता है, लेकिन इस तरीके की क्लिनिकल प्रभावशीलता के लिए और रिसर्च की ज़रूरत है।
CARBID के बनने से संक्रामक रोगों, फेज और ड्रग रेजिस्टेंस के क्षेत्रों में हो रही रिसर्च एक साथ आती है, और इस तरह यह भविष्य की समस्याओं को हल करने के तरीके खोजने का आधार बनता है।

