Nag Panchami 2026 Pujan Muhurat: सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि इस बार 16 अगस्त को शाम 4 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 17 अगस्त को शाम 5 बजे तक रहेगी। चूंकि 17 अगस्त को सूर्योदय के समय पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए पंचांग के अनुसार नाग पंचमी का पर्व सोमवार, 17 अगस्त को मनाया जाएगा।
23 साल बाद बना दुर्लभ संयोग
इस बार नाग पंचमी पर सावन के तीसरे सोमवार का व्रत भी रखा जाएगा। ऐसा संयोग इससे पहले साल 2003 में बना था। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का हर सोमवार विशेष माना जाता है, जबकि नाग पंचमी नाग देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति सम्मान का पर्व है। दोनों शुभ अवसर एक ही दिन पड़ने से धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
शुभ योगों का भी बन रहा संयोग
17 अगस्त को नाग पंचमी के साथ शुभ योग, शुक्ल योग और रवि नामक योग बनने की बात कही गई है। इसके अलावा गुरु के उच्च राशि में होने से हंसराज योग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष, पितृ दोष समेत कई दोषों से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
पंचमी तिथि क्यों है नाग देवता को समर्पित?
ज्योतिष शास्त्र में हर तिथि की एक अधिष्ठात्री शक्ति और देवता माने गए हैं। इसी क्रम में पंचमी तिथि का संबंध नाग देवता से माना जाता है। इसलिए सावन मास की पंचमी को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। सावन भगवान शिव का प्रिय मास है और महादेव का नागों से भी विशेष संबंध है। शिवजी अपने गले में नागराज वासुकी को धारण करते हैं, जबकि भगवान विष्णु के पास शेषनाग हैं, जिन्हें आदिशेष या अनंत नाग भी कहा जाता है। इसी वजह से साल की सभी पंचमी तिथियों में सावन की पंचमी को नाग पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
सुबह 5:50 से 8:28 बजे तक पूजा
नाग पंचमी पर पूजा का सबसे उत्तम समय सुबह 5 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नाग देवता की पूजा के लिए 2 घंटे 37 मिनट का समय मिलेगा। इसी अवधि में विधि-विधान से नाग देवता के साथ भगवान शिव की आराधना की जा सकती है। कालसर्प दोष, पितृ दोष और नाग संबंधी दोषों के लिए भी पूजा और उपाय किए जा सकते हैं।
अभिजीत और दूसरे मुहूर्त भी शुभ
नाग पंचमी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:25 एएम से 05:09 एएम तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 पीएम से 12:52 पीएम तक, विजय मुहूर्त दोपहर 02:37 पीएम से 03:29 पीएम तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 06:59 पीएम से 07:21 पीएम तक रहेगा। वहीं रवि योग सुबह 05:52 एएम से 08:04 एएम तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना शुभ माना गया है।
शिवलिंग और नाग देवता को क्या चढ़ाएं?
पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक अर्पित करें। वहीं नाग देवता को दूध, हल्दी, कुश और पुष्प अर्पित कर पूजा की जा सकती है। श्रद्धालु विधि-विधान और श्रद्धा के साथ भगवान शिव तथा नाग देवता का पूजन कर सकते हैं।
राहुकाल में पूजा को लेकर क्या करें?
17 अगस्त को राहुकाल सुबह 7 बजकर 31 मिनट से 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सामान्य शुभ कार्य और नाग देवता या भगवान शिव की पूजा से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में राहु-केतु से जुड़े दोषों की शांति के लिए शिव पूजन, मंत्र जाप और दोष निवारण के उपाय किए जा सकते हैं। कालसर्प दोष भी राहु-केतु से संबंधित माना जाता है।
नाग पंचमी पर नहीं रहेगी भद्रा
इस बार नाग पंचमी के दिन भद्रा नहीं है। इसलिए श्रद्धालुओं को भद्रा के कारण पूजा को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
सावन सोमवार और नाग पंचमी का महत्व
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। विशेष रूप से सोमवार को व्रत और पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। वहीं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा से परिवार की रक्षा, संतान सुख और धन-धान्य की प्राप्ति का विश्वास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, इसलिए नाग पंचमी पर शिव और नाग पूजा का विशेष फल मिलता है।
जीवित सांप को दूध न पिलाएं
नाग पंचमी पर जीवित सांप को दूध पिलाने के बजाय नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन भूमि की खुदाई करने और किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाने से भी बचना चाहिए। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा को भगवान शिव और नाग देवता की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
Read More:
900 कर्मचारियों की छंटनी से सुर्खियों में आए विशाल गर्ग खुद CEO पद से हटे, अब मांग रहे नौकरी

